रविवार के दिन मां पूर्णागिरि के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़।
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उत्तर भारत के सुविख्यात मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही का सिलसिला लगातार बना है। अवकाश के चलते रविवार को मां पूर्णागिरि के दर्शन को श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही। करीब 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में पूजा-अर्चना की। इधर, मेला प्रशासन मंगलवार से शुरू हो रहे नवरात्र की तैयारियों में जुट गया है। पुलिस महकमा सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने में जुट गया है।
होली के अगले दिन यानि 14 मार्च से शुरू हुए मेले में उत्तर भारत समेत देश के कोने-कोने से श्रद्धालु देवी के दर्शन को पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवक से पूर्णागिरि मेला क्षेत्र के अलावा टनकपुर, बनबसा एवं पड़ोसी देश नेपाल में भी जबरदस्त रौनक बनी है। 28 से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसके मद्देनजर मेला प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है। मेला मजिस्ट्रेट एसडीएम अनिल चन्याल ने बताया कि मेले में यातायात, पार्किंग, सुरक्षा आदि व्यवस्थाओं को नवरात्र से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यात्रियों को लेकर आने वाले भारी वाहन बूम पार्किंग स्थल से आगे नहीं जाने दिए जाएंगे। उचौलीगोठ के अलावा अन्य स्थानों पर भी वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस को पार्किंग स्थलों पर पर्याप्त फोर्स तैनात करने के साथ ही विद्युत ठेकेदार को पथ प्रकाश एवं जल संस्थान को पेयजल व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है।
पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रशासन गंभीर
नवरात्र में मेले की सुरक्षा, यातायात आदि व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन खासा चौकन्ना है। मेला क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था पर प्रशासन और जल संस्थान की विशेष नजर है। नवरात्र में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, इसके मद्देनजर व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रखना मेला प्रशासन के लिए चुनौती बना है। अवर अभियंता बीएस कुवार्बी ने बताया कि पेयजल योजना पर निगरानी के लिए मेला क्षेत्र में अतिरिक्त अवर अभियंता एवं पर्याप्त स्टाफ तैनात किया गया है।
बूढ़े मां-बाप को भी दर्शन करा रहे भक्त
बूढ़े मां-बाप को भी मां पूर्णागिरि के दर्शन कराने वाले भक्तों की संख्या भी पूर्णागिरि मेले में कम नहीं है। रविवार को फर्रुखाबाद से आए ऐसे ही भक्त पंकज कटियार ने अपनी 84 वर्षीय बूढ़ी मां को पूर्णागिरि के दर्शन कराए। उनका कहना था कि उन्होंने जब मां पूर्णागिरि के दर्शन की योजना बनाई तो सोचा कि मां के दर्शन यदि मां के साथ किए जाए तो इससे बढ़ा और कोई पुण्य नहीं है।