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भरोसे पर दिया वोट पर नहीं बनी रोड

Sun, 22 Nov 2015 10:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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बालातड़ी गांव के लोगों को 68 साल बाद भी आजादी का अहसास नहीं हो पाया है। सड़क सुविधा से वंचित यहां के लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर लोकसभा चुनावों का पूरी तरह बायकॉट करने का निर्णय लिया था। डीएम के आश्वासन पर लोगों ने बाद में वोट तो दे दिया, लेकिन उन्हें अब तक सड़क नहीं बनने का मलाल है।
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चारों ओर से चीड़ के जंगलों से आच्छादित गांव की आबादी आठ सौ से अधिक है। इस गांव के लोगों का दुर्भाग्य है कि इसे कोर नेटवर्क में सड़क से आच्छादित दिखाए जाने के कारण यहां सड़क बनने का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया। बाद में बड़ी मुश्किल से इसको सड़क से अभावग्रस्त की श्रेणी में लिया गया, जिससे इसे पीएमजीएसवाई में शामिल किया गया। वर्ष 2012 में यहां सड़क बनाने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया गया। डीपीआर समेत वन भूमि के हस्तांतरण आदि प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए विभाग ने देहरादून की एक कंपनी से अनुबंध किया गया है, जिसने अब तक यह कार्य पूरा नहीं किया है। अब सरकार ने भूमि हस्तांतरण करने के बाद ही धन की स्वीकृति दिए जाने का नया नियम बनाने से यह कार्य लटका हुआ है।

खुली बैठक में छाया रहा सड़क का मुद्दा
शनिवार को गांव की खुली बैठक में सड़क का मुद्दा विशेष रूप से छाया रहा। ग्राम प्रधान हरीश भट्ट, उप प्रधान चिंतामणि भट्ट ने सड़क नहीं बनने पर रोष जताया। साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभी से रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा दिया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि से लेकर सरकारी अधिकारी ग्रामीणों के साथ छलावा करते आ रहे हैं।
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इंतजार में बुजुर्गों की आंखें पथराई
गांव के बुजुर्ग सद राम, मनोरथ भट्ट, प्रेमबल्लभ, रेवती देवी, गोमती देवी की आंखें सड़क के लिए पथरा गई हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचे इन लोगों का कहना है कि हमने तो जैसे तैसे जीवन काट लिया है, अब यहां सड़क न होने से अपनी आंखों से गांव के चमन को उजड़ता हुआ देखने का उन्हें सबसे बड़ा मलाल है।

जल्द मिलेगी सड़क निर्माण को स्वीकृति
कांग्रेस के प्रांतीय उपाध्यक्ष भगीरथ भट्ट का कहना है कि सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण की पत्रावली सभी औपचारिकताओं के साथ नोडल अधिकारी के यहां पहुंच चुकी है, जिसमें शीघ्र स्वीकृति की उम्मीद की जा रही है।
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