क्षेत्र पंचायत समिति (बीडीसी) की बैठक पर ग्राम प्रधानों की नाराजगी भारी पड़ी। प्रधानों के विरोध के चलते बीडीसी की बैठक नहीं हो सकी। विरोध जताने के बाद ग्राम प्रधान संगठन ने अलग से बैठक कर सरकार पर उपेक्षा एवं अधिकारों पर अतिक्रमण का आरोप लगाया।
एसडीएम नरेश दुर्गापाल, जेएस राठौर, डीडीओ वीके उपाध्याय और बीडीओ शिल्पी पंत ने प्रधानों को समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन प्रधान संगठन बहिष्कार के फैसले पर अडिग रहा। ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि 14वें वित्त आयोग की रकम पर भी राज्य सरकार की नजर है। इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार उपयोग कर रही है, जो सीधे ग्राम पंचायतों के अधिकारों पर चोट है। प्रदेश में पंचायतराज अधिनियम शीघ्र लागू कर सभी 32 विभाग पंचायतों के अधीन करने की मांग की गई।
इसी तरह मनरेगा के अंतर्गत ग्राम प्रधानों की स्वीकृति के बिना निर्माण कार्य नहीं करने, ग्राम प्रधानों के मानदेय में बढ़ोतरी, बैठक में हिस्सा लेने के लिए यात्रा व्यय देने के अलावा पांच लाख रुपये तक के निर्माण कार्य सीधे ग्राम पंचायतों से कराने की मांग की गई। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी गई।
बहिष्कार करने से पूर्व इन बिंदुओं से संबंधित ज्ञापन ब्लाक प्रमुख पुष्पा सकारी को दिया गया। संगठन अध्यक्ष सुरेंद्र नाथ के नेतृत्व में वरिष्ठ उपाध्यक्ष केशव दत्त मौनी, मुकेश जोशी, देवेंद्र सिंह, महेश, विनोद, दीपा, रूपा, शांति जोशी, कमला पांगती, नवीन सिंह, उत्तम सिंह, सुनीता देवी, अनीता देवी, विजय राणा आदि थे।