चंपावत। विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में सैन्यकर्मी अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्त को दोषमुक्त किया।
बीएससी पास युवती ने नवंबर 2021 में चंपावत कोतवाली में तहरीर देकर कहा कि वर्ष 2017 में हाईस्कूल में पढ़ने के दौरान उसकी जान पहचान 27 वर्षीय रंजीत से हुई थी। दोनों में मोबाइल पर बातचीत होने लगी और फिर वह युवक से प्रेम करने लगी। दो माह बाद आरोपी ने उसे अपने दोस्त के कमरे में बुलाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए। जुलाई 2021 तक दोनों के बीच कई बार संबंध बने।
पीड़िता का कहना था कि अभियुक्त ने उसे शादी का भरोसा दिया। दोनों के परिजन में भी बात होती थी। बाद में युवक ने कुंडली नहीं मिलने और युवती के मांगलिक होने के कारण परिजन शादी से इन्कार करने की बात कहने लगा।
पीड़िता ने कहा कि बाद में अभियुक्त ने अपने दोस्त के लिए अच्छी लड़की बताने को कहा। पीड़िता ने अपनी सहेली की फोटो अभियुक्त को दिखाई और कुंडली दी। अभियुक्त ने उसकी सहेली से अपनी शादी तय कर ली। आहत होकर लड़की ने अभियोग पंजीकृत कराया।
कोर्ट ने कहा कि यह सही है वयस्कता की आयु प्राप्त करने से अवयस्कता के दौरान बने शारीरिक संबंध अपराध से बाहर नहीं हो जाते लेकिन यह युक्तियुक्त रूप से स्पष्ट नहीं होता है कि अभियुक्त का आशय शुरू से ही पीड़िता से विवाह का नहीं था। पीड़िता ने पहली बार संबंध बनने के चार वर्ष बाद पुलिस में तहरीर दी थी। पीड़िता ने कोर्ट में कहा कि अभियुक्त उससे शादी कर लेता तो वह शिकायत नहीं करती। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करार दिया।