एक तहसील वाले चंपावत जिले में तहसीलों की तादात राज्य बनने के बाद बढ़कर पांच हो गई। संख्या जरूर बढ़ी, मगर तहसील के हाल नहीं। सबसे नई बनी बाराकोट तहसील इसकी एक बानगी है। जहां न तो स्टाफ है और न ही भवन। तहसील कार्यालय राजस्व निरीक्षक के कमरों से चल रहा है। वहीं प्रशासनिक काम के लिए एसडीएम और तहसीलदार भी नहीं है।
चंपावत जिले के बाराकोट को तीन साल पहले तहसील का दर्जा दिया गया। लोगों को लगा कि छोटी प्रशासनिक इकाई बनने से परेशानी कम होगी। तहसील शुरू होने के बावजूद यहां न स्टाफ है और न ही भवन। बुनियादी ढांचे की कमी से काम में अड़चन आ रही है। तहसील में न एसडीएम का पद है और न ही तहसीलदार का। व्यवस्था का जिम्मा नायब नाजिर और रजिस्ट्रार कानूनगो (आरके) का है। डाटा इंट्री ऑपरेटर आउटसोर्स किया गया है। यहां प्रमाणपत्र बनाने का काम प्रांतीय रक्षक दल का जवान करता है।
तहसील कार्यालय के लिए भवन तक नहीं है। इस समय यहां का कार्यालय राजस्व निरीक्षक के कक्षों में संचालित हो रहा है। तहसील के लिए पांच नाली भूमि की रजिस्ट्री की जा चुकी है लेकिन भवन नहीं बन पाया है। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, रजिस्ट्रार कानूनगो, नायब नाजिर, डब्लूबीएन, डाटा इंट्री ऑपरेटर आदि पद स्वीकृत हैं। इनमें से तहसीलदार, नायब तहसीलदार आदि के पद खाली है। एसडीएम का पद सृजित भी नहीं है। तीन साल बाद भी यह तहसील कामचलाऊ हालात में है।
राज्य सरकार करे विशेष पहल
प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण सिंह अधिकारी के पौत्र राजू अधिकारी का कहना है काकड़, बाराकोट के लोगों ने आजादी के लिए जो त्याग किया है। उसके एवज में यहां का कोई सम्यक विकास नहीं हो पाया। जिसके लिए राज्य सरकार को विशेष पहल करनी चाहिए।
बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जाए
जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी का कहना है कांग्रेस सरकार ने यहां उप तहसील की स्थापना की थी। अब यहां बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की पहल की गई है। सीएम का इस ओर ध्यान है।
सभी पदों पर नियुक्तियां करे सरकार
वयोवृद्ध समाजसेवी खीमानंद जोशी ने कहा तहसील तो खुल गई लेकिन अभी तक तहसीलदार की कुर्सी खाली पड़ी हुई है। अच्छा होता सभी पदों पर नियुक्तियां कर सरकार यहां के लोगों को राहत देती।
कामचलाऊ चल रही हैं सभी व्यवस्थाएं
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा जोशी ने कहा तहसील विकास का महत्वपूर्ण केंद्र होती है। लेकिन यहां सभी व्यवस्थाएं कामचलाऊ हैं। तहसीलदार समेत सभी पदों पर नियुक्तियां कर ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाना चाहिए।