जिले की पाटी तहसील के एक गांव में दो लोगों द्वारा 15 साल की किशोरी से दुराचार का मामला सामने आया है। आरोपियों ने बारात के शोरगुल का लाभ उठाकर घटना को अंजाम दिया। आरोपी किशोर बताए जा रहे हैं। वहीं, पीड़िता के परिजन तीन दिनों तक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए भटकते रहे।
पाटी, लोहाघाट अस्पतालों के अलावा चंपावत जिला अस्पताल में भी पीड़िता के परिजनों को गुमराह किया गया तथा उसके इलाज में भी कोताही बरती गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 17 अप्रैल की रात पाटी के दूरस्थ गांव में अल्मोड़ा जिले के बुक्साड़ गांव से बारात आई थी। पूरा गांव जश्न में डूबा था, बारात में शोरगुल का फायदा उठाकर दो बारातियों ने एक किशोरी के साथ गोशाला में घुसकर दुष्कर्म किया।
किशोरी का शोर-गुल सुना तो परिजनों ने दरवाजा तोड़ कर उसे आजाद कराया। इस बीच आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। बताया जाता है कि पीड़िता अपनी एक अन्य सहेली के साथ पास स्थित गोशाला में गायों को घास डालने गई थी कि उक्त आरोपी भी गोशाला में घुस आए। इस बीच पीड़िता के साथ आई उसकी सहेली भागने में कामयाब रही, जबकि आरोपियों ने गोशाला का दरवाजा बंद कर पीड़िता को दुष्कर्म का शिकार बनाया।
परिजनों ने गोशाला का दरवाजा तोड़कर पीड़िता को बाहर निकाला। इसके बाद पीड़िता के परिजनों ने पाटी ब्लॉक में रिपोर्ट दर्ज करानी चाही, लेकिन पाटी पुलिस संवेदनहीन बनी रही और मामला दर्ज नहीं किया। उल्टा किशोरी के परिजनों को मेडिकल करवाने के लिए कह दिया। उसके बाद किशोरी के परिजन लोहाघाट सीएचसी में मेडिकल कराने पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां से भी चंपावत जिला अस्पताल भेज दिया गया।
जिला अस्पताल ने चंपावत पुलिस को मामले की जानकारी दी। कोतवाल बीसी शर्मा ने बताया कि पीड़िता को मेडिकल के लिए भेजा गया। जिला अस्पताल में डा.संगीता त्रिपाठी ने पीड़िता का मेडिकल किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 511, 342 के साथ ही 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी। पीड़िता के परिजन काफी गरीब हैं और बदनामी के डर से कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
जिला अस्पताल में नहीं मिली मामूली दवा
पीड़िता और उसके परिजनों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भी धक्के खाने पड़े। कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ित और उसके परिजन अपरान्ह दो बजे जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन परीक्षण की स्लाइड बनाने के लिए जरूरी दवा भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। इसके चलते डॉक्टर ने पीड़ित के पिता को बाजार से दवाई लेने का हुकम सुनाया।
पीड़िता के पिता बाजार से दवाई (कलचर ट्यूब) खरीदने को भटकते रहे, लेकिन किसी भी मेडिकल स्टोर पर दवाई नहीं मिली। मुख्य चिकित्साधीक्षक का ध्यान इस ओर दिलाने पर शाम पांच बजे किसी निजी स्टोर से दवा उपलब्ध हो पाई। इसके बाद पीड़िता का मेडिकल हो सका। सीएमएस डा.आरके जोशी का कहना है कि संबंधित दवाई कभी कभार ही उपयोग में आती है।
लिहाजा ये दवाई अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। बाद में बाहर से दवाई लाकर पीड़िता का मेडिकल किया गया। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में एक अदद दवाई नहीं होने से पहले से ही परेशान पीड़िता और उसके परिजनों को तीन घंटे तक भटकना पड़ा।