जिला मुख्यालय से चार किमी दूर सिलिंगटाक में स्थित चाय बागान जल्द ही टी-टूरिज्म योजना से जुड़ जाएंगे। इसके तहत चाय बागान के इर्द-गिर्द पर्यटन विभाग और उद्यान विभाग के माध्यम से टी-टूरिज्म की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटन विभाग की ओर से इस संबंध में भेजे गए प्रस्ताव को शासन स्तर पर मंजूरी मिल गई है।
बीते 23 अक्तूबर को अल्मोड़ा के भ्रमण के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सिलिंगटाक चाय बागान क्षेत्र में टी-टूरिज्म विकास के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान करते हुए इसे अपनी घोषणाओं में शामिल किया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट के अनुसार प्रस्तावित योजना को शासन की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद चाय बागान में आने वाले सैलानियों को टी-बुटिक (विविधतापूर्ण जैविक चाय) की सुविधा के अलावा व्यू प्वाइंट, छतरी बैंच का निर्माण किया जाएगा।
साथ ही चाय बागान में भ्रमण के लिए वॉकिंग ट्रेल की सुविधा भी रहेगी। पर्यटकों के घूमने के लिए टी गार्डन में जगह-जगह रास्तों का निर्माण किया जाएगा। सिलिंगटाक चाय बागान में आने वाले सैलानियों को चाय के बागान का आनंद मिलेगा और वे उच्च क्षमता की दूरबीन के जरिए हिमालय दर्शन भी कर सकेंगे।
केवल फोटो खिंचाने तक सीमित रह जाते हैं सैलानी
चंपावत। जिले में सिलिंगटाक, छीड़ापानी, च्यूराखर्क, मुडियानी, लमाई, चौकी, कालूखान, भगानाभंडारी, लधौन, मौराड़ी, नरसिंहडांडा, गडक़ोट, चौड़ा, मझेड़ा, मंच, गुरूखोलीगूंठ, खूनाबोरा, बलांई, डिंगडई आदि स्थानों में चाय के बागान स्थित हैं। वर्तमान में इन चाय बागानों में घूमने वाले सैलानियों का तांता लगा रहता है लेकिन बागानों में सैलानियों के लिए सुविधाओं का अभाव होने के चलते सैलानी केवल फोटो खिंचाने तक ही सीमित रह जाते हैं।
220 हेक्टेयर में विकसित हो चुके हैं चाय बागान
चंपावत। जिले में चाय विकास बोर्ड की ओर से अब तक 220 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चाय बागान विकसित करने में सफलता प्राप्त की गई है। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड ने बताया कि चालू वर्ष में दो नई साइट विकसित की जा रही हैं जिनमें अभी तक 30 हजार पौधों का रोपण कर इसकी शुरूआत कर दी गई है।