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Champawat News: औषधि गुणों से भरपूर काले गेहूं, काली हल्दी की खेती कर रहे तारादत्त

Wed, 10 Dec 2025 11:07 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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 तारादत्त पंगरिया, काश्तकार।
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चंपावत। जिले के एकमात्र काश्तकार तारादत्त पंगरिया औषधि गुणों से भरपूर काला गेहूं और काली हल्दी की खेती कर रहे हैं। दोनों फसलों की असाधारण स्वास्थ्य विशेषताओं के चलते उन्होंने इसके उत्पादन का निर्णय लिया। राकड़ीफुलारा निवासी प्रगतिशील काश्तकार तीन साल से 45 नाली भूमि में काला गेहूं और 40 नाली भूमि में काली हल्दी की खेती कर रहे हैं। अब तक वह 20 क्विंटल गेहूं का उत्पादन कर बेच चुके हैं। काला गेहूं का आटा प्रतिकिलो 600 रुपये बिक रहा है। अधिकांश आटा हरियाणा ही भेजा जाता है। स्थानीय स्तर पर थोड़ी मात्रा में उन्हें आटे के 700 रुपये किलो तक दाम मिल जाते हैं।
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इसके अलावा उन्होंने अमिया हल्दी भी लगाई है। अमिया हल्दी आम की तरह होती है। यह थोड़ा कड़वी होती है, लेकिन यह सलाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इस बार वह दिल्ली स्थित आजादपुर मंडी में 25 क्विंटल काली हल्दी बेचेंगे। प्रतिकिलो 500 रुपये काली हल्दी के मिल जाते हैं।
हरियाणा से लेकर आए काला गेहूं
काश्तकार तारादत्त ने बताया कि तीन किलो गेहूं के बीज हरियाणा से लेकर आए। इसका इस्तेमाल बीज तैयार करने के लिए किया। उन्होंने बताया कि काले गेहूं का बीज 1200 से 1500 किलो तक मिलता है। इसकी खेती में कम बीच लगते हैं। हल्दी के बीज पंतनगर और राजस्थान से लेकर आए।
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काला गेहूं फाइबर से भरपूर
काले गेहूं में एंथोसायनिन, कैरोटीनॉयड और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। जो इसे कैंसर, हृदय रोग और सूजन जैसी बीमारियों के खिलाफ प्रभावी बनाता है। इसमें सामान्य गेहूं से 20 गुना ज्यादा औषधीय गुण होते हैं, जो ऊर्जा, प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।
काली हल्दी अस्थमा, त्वचा रोग में कारग
काली हल्दी नीले-काले रंग की तेज सुगंध वाली होती है। इसमें कुरकुमिन की मात्रा पीली हल्दी से अधिक होती है। काली हल्छी अस्थमा, त्वचा रोग, मोच, जोड़ों के दर्द और पाचन संबंधी समस्याओं में फायदेमंद है। इसमें प्राकृतिक रूप से कीट नहीं लगते।
कोट
काला गेहूं और काली हल्दी औषधीय गुणों से युक्त है। भविष्य में अगर कोई ऐसी योजना आएगी तो प्राथमिकता के आधार पर उन्हें लाभ दिया जाएगा। - धनपत कुमार, कृषि अधिकारी, चंपावत
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