टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच करीब 19 घंटे बाद खुल गया है। राजमार्ग बंद होने से लोगों को भारी परेशानी हुई। इस दौरान ट्रक, बसें और अन्य वाहनों की आवाजाही भी रोक दी गई थी। सोमवार रात चंपावत में फंसे लोगों को रहने एवं खाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। यहां से करीब 12 किलोमीटर दूर धौन के पास छतकांडा के ठुलखोला में आए भारी मलबे से सोमवार अपरान्ह 2.35 बजे से बंद एनएच मंगलवार सुबह 10.10 बजे खुल गया।
करीब 150 फुट ऊंचाई से लगातार हुए भूस्खलन ने न केवल लंबे समय तक सड़क को बंद रखा, बल्कि काम में भी बाधा पहुंचाई। सड़क को खुलवाने के लिए जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी मनोज पांडेय, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, एनएच खंड के सहायक अभियंता एमसी पांडेय, राजस्व निरीक्षक हरीश जोशी सहित कई अफसर मौके पर डटे रहे।
सिख तीर्थयात्रियों ने रैनबसेरे में रात गुजारी
चंपावत। पंजाब के गुरुदासपुर से आए सिख तीर्थयात्रियों का जत्था भी एनएच बंद होने से रातभर फंसा रहा। रीठा साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेकने के बाद सोमवार को ये जत्था यहां रुका रहा। प्रशासन ने इन तीर्थयात्रियों के भोजन की व्यवस्था के अलावा नगर पालिका के रैनबसेरे में रात्रि विश्राम की व्यवस्था कराई। यात्रा दल में सरदार अमरीक सिंह, देवेंद्र सिंह, अमर इकबाल सिंह, कुलवंत सिंह, सतनाम सिंह, जगवीर सिंह, हरबंश कौर आदि शामिल थे। ये दल पटना साहिब, पोंटा साहिब होते हुए यहां पहुंचा था।
लोहाघाट रोडवेज को तीन लाख का नुकसान
लोहाघाट (चंपावत)। एनएच बंद होने से न केवल यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि रोडवेज को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। सोमवार को अपरान्ह बाद सड़क पर मलबा आने के बाद से अधिकांश बसें देवीधुरा होते हुए हल्द्वानी, देहरादून आदि मार्गों पर गई। रोडवेज के प्रभारी सहायक मंडलीय प्रबंधक केएस राणा ने बताया कि यातायात बाधित होने से डिपो को करीब तीन लाख रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है।