निकायों के संरचनात्मक ढांचे के पुनर्गठन में टनकपुर नगर पालिका परिषद की उपेक्षा से पुनर्गठन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आय के मामले में यह नगरपालिका श्रेणी दो के मानक पूरा करती है, बावजूद इसके इसे श्रेणी तीन में रखा गया है। श्रेणी के कारण पालिका को न सिर्फ शासन से बजट कम मिलेगा, बल्कि सृजित पदों की संख्या में भी कटौती होगी।
अलग राज्य बनने के बाद सरकार ने पहली बार निकायों के ढांचे का पुनर्गठन किया है। वित्त की संस्तुति के बाद गत 12 जून को राज्य के छह नगर निगमों, 32 नगर पालिका परिषदों और 45 नगर पंचायतों का पुनर्गठन किया गया है। जनसंख्या, आमदनी और जिला मुख्यालय को मानक मानकर निकायों की श्रेणी तय की गई है। नगर निगमों और नगर पालिका परिषदों को तीन-तीन और नगर पंचायतों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी एक में उन नगर पालिकाओं को शामिल किया गया है, जिनकी आय एक करोड़ या उससे अधिक हो अथवा फिर जिला मुख्यालयों की वे नगर पालिकाएं जिनकी स्वयं के स्रोत से आय 50 लाख रुपये हो। श्रेणी दो में उन नगर पालिकाओं को रखा गया है जिनकी स्वयं के स्रोत से आय 50 लाख रुपये हो या जिला मुख्यालयों की नगर पालिका हो तथा जिनकी जनसंख्या 50 हजार से अधिक हो। श्रेणी दो के मानकों को पूरा नहीं करने वाली नगर पालिकाओं को श्रेणी तीन में रखा गया है, जिनमें टनकपुर नगर पालिका भी शामिल है। यह नगर पालिका भले ही जनसंख्या और जिला मुख्यालय के मानक में न हो, लेकिन आमदनी के मामले में श्रेणी दो के मानक पूरा करती है। मौजूदा समय में पालिका की वार्षिक आय 51 लाख रुपये है, जबकि श्रेणी दो के लिए आय का मानक 50 लाख रुपये या इससे अधिक माना गया है।