चंपावत। विकासखंड लोहाघाट के मंगोली ग्राम पंचायत का कोटला गांव नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य के अभाव में लोगों ने यहां से पलायन कर लिया। गांव में कुल 20 से 25 लोग रह रहे हैं। गांव की जनसंख्या चार दशक में महज 10 फीसदी में सिमटकर रह गई है।
गांव के अधिकतर युवा बाहरी क्षेत्रों में दो जून रोटी की तलाश में भटक रहे हैं। गांव के वर्षों से छोड़े गए मकानों के आसपास बड़ी-बड़ी कंटीली झाड़ियां उग आई हैं। बदहाल सड़क के कारण लोगों के लिए यहां जीवन यापन आसान नहीं था। काश्तकारों की उपज गांव में बर्बाद हो रही थी। चार दशक पहले तक ग्राम पंचायत में 250 से अधिक परिवार थे।
ग्रामीण निर्मल पांडेय बताते हैं कि अब 12 परिवार कोटला, आठ बगेड़ी, 15 ढूंगी और महज दो परिवार मेल्टा में रह गए हैं। वहीं, स्कूल बस चालक योगेश सिंह बताते हैं कि सात वर्षों से गांव के बच्चे चौमेल विद्यालय जा रहे हैं। सड़क की दशा तब भी खराब थी, अब भी कोई सुधार नहीं है। कई बार तो उतरकर गड्ढों में पत्थर भरकर वाहन पार कराया है। सड़क में हर समय दुर्घटना का खतरा रहता है।
सड़क को लेकर हो रही कार्यवाही
पूर्व प्रधान मंगोली चांद बोहरा बताते हैं कि कोटला तोक की आबादी अंगुलियों में सिमट गई है। शादी, नामकरण और श्राद्ध भेाज में पहले 12 नाली के तौलों में भात पकाया जाता था। आज 20 किलो चावल की रसोई का खाना भी पर्याप्त हो जाता है। लोहाघाट-चौमेल लिंक सड़क से प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सिरतोली-मंगोली-कोटला नाम से सड़क का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
भरपूर मात्रा में होते हैं सिटरस फल आदि
क्षेत्र में दलहन, तिलहन के साथ ही सिटरस फल, सब्जी आदि यहां पर भरपूर मात्रा में पैदा किया जाता है। जो पूर्व में ग्रामीणों की आर्थिकी का भी साधन रहा है। गांव का प्राइमरी विद्यालय दो किमी दूर मंगोली में है। कोटला से पांच बच्चे प्राइमरी में पढ़ाई के लिए मंगोली जाते हैं। आर्थिक रूप से संपन्न कुछ परिवार अपने बच्चों को चौमेल, लोहाघाट के निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लोहाघाट से कोटला 14 किमी की दूरी पर है।
ग्रामीणों की पीड़ा
- प्राथमिक स्तर से ही गांवों में शिक्षा के लिए विद्यालयों की कमी है। प्राथमिक विद्यालय गांव से दूर होने के चलते यहां पर अभिभावक कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की कमी के चलते लोग यहां से बाहरी क्षेत्रों की ओर एक-एक कर पलायन करते जा रहे हैं। - त्रिलोचन पांडेय, ग्रामीण, कोटला।
- गांव में बिजली, पानी आदि की बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद यहां की कच्ची और खराब सड़क के चलते लोग यहां रहना ही नहीं चाहते। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। - पूजा पांडेय, छात्रा, स्थानीय।
- बच्चों की अच्छे स्कूलों में पढ़ाई हो, यह सभी अभिभावकों की इच्छा होती है। एक तो गांव की सड़क कच्ची है, दूसरा बारिश के समय मार्ग बंद हो जाता है। पूरी तरह दुनिया से संपर्क कट जाता है। बच्चों के लिए भी स्कूल जाना आसान नहीं होता है। ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क को चलने लायक बनाया है। - ज्योति पांडेय, ग्रामीण कोटला।
कोट
किमतोली कोटला सड़क पर डामरीकरण के लिए टेंडर हो चुके हैं। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।- वैभव गुप्ता, ईई पीएमजीएसवाई, चंपावत
14सीपीटी01 पी- कोटला गांव का एक घर।
14सीपीटी02पी-त्रिलोचन पांडेय, ग्रामीण, कोटला।
14सीपीटी03पी-पूजा पांडेय, छात्रा, स्थानीय।
14सीपीटी04 पी-ज्योति पांडेय, ग्रामीण कोटला।