न नई स्वाइप मशीन मिली, न पुरानी ठीक हो रही
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डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहन को प्रशासनिक स्तर पर भी मुहिम चल रही है, पर जमीनी हालात अलग हैं। स्वाइप मशीनों को लेकर बैंक और कंपनी का रवैया ढीलाढाला है। न खराब स्वाइप मशीन ठीक हो रही है, और नहीं नई मशीनें मिल रहे हैं।
थ्वाल बुक डिपो के स्वामी पूरन थ्वाल लंबे समय से इलेक्ट्रानिक लेनदेन करते हैं। नोटबंदी के बाद उन्होंने ग्राहकों की समस्या को दूर करने के लिए दुकान में स्वाइप मशीन के लिए आवेदन किया। आवेदन करे एक माह बीत गया है, लेकिन मशीन नहीं मिली। इसके अलावा यहां दोनों पेट्रोल पंपों सहित कुछ अन्य लोगों ने भी स्वाइप मशीन की डिमांड की है। मगर उन्हें भी अभी ये मशीनें उपलब्ध नहीं हो सकी है। पेट्रोल पंपों पर प्लास्टिक मनी का उपयोग करने वालों को तेल उत्पादों में 0.75 प्रतिशत की छूट है। मगर फिलहाल यहां के लोग इस छूट का लाभ नहीं उठा सकेंगे।
वहीं खर्कवाल मेडिकल स्टोर की स्वाइप मशीन करीब एक महीने से खराब है। मेडिकल स्टोर के स्वामी मशीन को ठीक करने के लिए कई बार कंपनी और बैंक से आग्रह कर चुके हैं, पर इस खामी को अभी तक दूर नहीं किया जा सका है, और मशीन का उपयोग न होने से धंधे पर असर पड़ रहा है। उधर, एसबीआई के मुख्य प्रबंधक हीरा सिंह पांगती का कहना है कि नई स्वाइप मशीनें अभी नहीं आई है। साथ ही खराब मशीन को ठीक करने के लिए संबंधित कंपनी से कहा गया है।