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न पर्याप्त शिक्षिकाएं न जरूरी बुनियादी ढांचा 

Sat, 10 Dec 2016 09:45 PM IST
नवल जोशी/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
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लोहाघाट जीजीआईसी में जमीन में बैठकर पढाई करती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) को आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया गया है, पर इसमेें भी न पर्याप्त शिक्षिकाएं हैं और नहीं जरूरी बुनियादी ढांचा है। बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं होने से अधिकांश छात्राएं जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
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इस साल के शुरू में लोहाघाट जीजीआईसी को आदर्श विद्यालय बनाया गया था, पर यहां पढ़ने वाली 600 छात्राओं  के लिए शिक्षिकाओं की कमी है। जीव विज्ञान, गृह विज्ञान और हिंदी में प्रवक्ता के पद खाली होने से इन विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका असर परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा है।

चहारदीवारी की ऊंचाई कम होने से अराजक तत्वों से सुरक्षा को खतरा बन रहा है। छात्रावास, प्रधानाचार्य कक्ष और स्टाफ रूम का भी निर्माण नहीं हुआ है। साथ ही बच्चों के खेलने के लिए कायदे का खेल मैदान नहीं है। यही नहीं बच्चों के लिए  मध्याह्न भोजन योजना के लिए डायनिंग हॉल भी नहीं है। जिसके चलते बारिश और  गर्मी में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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अभिभावक उठा रहे स्वच्छक और चौकीदार का खर्च
जीजीआईसी में स्वच्छक और चौकीदार के पद खाली होने से अभिभावकों की जेब ढीली हो रही  है। स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष गोपाल ढेक का कहना है कि  विद्यालय की व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस साल फरवरी से इन दोनों पदों पर  पीटीए के माध्यम से मानदेय दिया जा रहा है। ढेक का कहना है कि कई बार एक  साथ काफी शिक्षिकाएं अवकाश में चली जाती है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।  उन्होंने एक साथ शिक्षिकाओं को अवकाश नहीं देने की भी मांग की है।

विद्यालय में शिक्षिकाओं की कमी से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। शिक्षिकाओं की तैनाती की मांग एवं यहां अन्य कार्यों के लिए उनके द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों  को पत्र भेजा गया है।
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मीना शुक्ला, प्रधानाचार्या, जीजीआईसी लोहाघाट।
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