फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपाल की तरफ से टनकपुर पहुंचा टिड्डियों का झुंड, किसान चिंतित

विज्ञापन
टनकपुर पहुंचे टिड्डियों के दल से जमी पर गिरी टिड्डी। - फोटो : TANAKPUR
विज्ञापन
टनकपुर (चंपावत)। उत्तर भारत के कई राज्यों में फसलों का तबाह कर चुका टिड्डियाें का झुंड अब टनकपुर पहुंच गया है। शुक्रवार दोपहर अचानक आसमान में टिड्डियों के झुंड को मंडराते देख लोग चिंतित हो गए हैं। बताया जा रहा है कि टिड्डियों का यह दल नेपाल सीमा की ओर से टनकपुर पहुंचा है। देर शाम तक टिड्डियों का झुंड आसमान में ही मंडराता नजर आया, हालांकि फसलों में हमले की सूचना नहीं थी। सूचना पर प्रशासन ने कृषि विभाग को अलर्ट करते हुए बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे नेपाल सीमा की ओर से आसमान में जैसे ही टिड्डियों का झुंड मंडराता नजर आया। देखते ही देखते समूचे क्षेत्र में टिड्डियों के आतंक का खौफ छा गया। विशेषकर किसान वर्ग खासा चिंतित हो गया है। वहीं इसकी सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। एसडीएम दयानंद सरस्वती और तहसीलदार खुशबू पांडेय ने बताया कि कृषि विभाग को अलर्ट कर टिड्डियों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने बताया कि जिले के मुख्य कृषि अधिकारी टिड्डियों के संभावित हमले के मद्देनजर पहले से ही टनकपुर क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं और बचाव को जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
टिड्डी दल के अलर्ट से मचा हड़कंप
चंपावत। टिड्डी दल के एलर्ट से चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र में हड़कंप मचा है। टिड्डियों के प्रकोप का उत्तर प्रदेश से लगे उत्तराखंड के जिलों में भी खतरे के अंदेशेे का ऊधमसिंह नगर जिले से शुक्रवार को अलर्ट मिला। इसमें यूपी से लगे प्रदेश के तीन जिलों (चंपावत, यूएस नगर और नैनीताल) में टिड्डियों के खतरे को लेकर आगाह किया गया है। इसकी भनक लगते ही आननफानन में चंपावत के मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने टनकपुर पहुंच खेतों का मुआयना करने के साथ किसानों को आगाह किया।
विज्ञापन

सीएओ ने बताया कि पीलीभीत जिले के पूरनपुर में टिड्डियों का व्यापक प्रकोप हुआ है। साथ ही इससे सीमा से लगे मझोला, खटीमा, चोरगलिया, टनकपुर तक पहुंचने का अंदेशा है। इसकी भनक लगने के बाद कृषि विभाग तत्काल सक्रिय हुआ। इस वक्त मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में धान और मक्का की खेती हो रही है। सीएओ उप्रेती ने कुछ स्थानों पर स्प्रे भी करवाया। साथ ही विभागीय टीम के जरिए बचाव के उपायों की जानकारी दी है।
इन कदमों को उठाने की दी गई है नसीहत:
- खेतों का नियमित निरीक्षण करें।
- अंड समूह के जगहों का पता लगा उस क्षेत्र में गड्ढे खोदकर टिड्डियों के दल को नष्ट करें।
- प्रभावित क्षेत्रों में चिड़ियों के बैठने का स्थान बनाकर चिड़ियों को आकर्षित किया जाए।
- खेतों के आसपास टिड्डी दल दिखाई देने पर ड्रम, टिन के डिब्बों को बजाएं।
- जिन क्षेत्रों में फसल न हो, वहां रात में टिड्डियों को आग की लौ जला कर नष्ट कर दें।
- टिड्डी दल के रास्ते में विषाक्त चारा (कीटनाशी युक्त गेहूं या चावल का चोकर) का प्रयोग करें।
- टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु गाड़ियों में लगे स्प्रेयर का प्रयोग किया जा सकता है।
- संश्लेषित कीटनाशियों के छिड़काव के समय किसानों को खुद की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा।
बहुभक्षी हो जाता है टिड्डी दल
चंपावत। सामान्य रूप से एकांत में रहने वाली टिड्डियां अनुकूल वातावरणीय दशाओं व भोजन की प्रचुरता पर समूह में रहने लगते हैं। समूह में होने पर ये टिड्डी दल बहुभक्षी हो जाता है। साथ ही तमाम वनस्पतियों को खा जाती है। एक मादा टिड्डी अंडों को अंड समूह में मुख्य रूप से बलुई भूमि की सतह से 15 सेंटीमीटर नीचे देती है। दो-तीन अंड समूहों में 100 अंडे प्रति समूह देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें