जान जोखिम में डाल कर क्वैराला नदी को पार कर स्कूल जाते छात्र छात्राएं।
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दूरस्थ क्वैराला घाटी के कई छात्र- छात्राएं भविष्य संवारने के लिए हर रोज खतरे का सामना करने को मजबूर हैं। घर से स्कूल बीच में पड़ने वाली क्वैराला नदी को पार करना करना उनके लिए चुनौती रहता है। खासकर बरसात में उफनती नदी को पार करना जोखिम भरा रहता है। इसकी वजह नदी पर पुल का न होना है। लंबे समय से मांग करने के बावजूद एक अदद पुल नहीं बन सका है।
क्वैराला घाटी की तीन ग्राम पंचायतों (बड़ोली, घुरचुम और अमकड़िया) के ग्रामीणों को पुल की सख्त जरूरत है। तीन ग्राम पंचायतों की चार हजार से अधिक आबादी पुल के निर्माण लिए तरस रही है। 250 छात्र संख्या वाले राजकीय इंटर कॉलेज पाली में पड़ंगा, न्याड़ी, रुयूनी, तोला, रीठा, स्यूली और द्यूड़ी गांव के 54 छात्र- छात्राएं हर रोज क्वैराला नदी को पैदल पार कर पढ़ाई करने जाते हैं। उन्हें हर रोज खतरे से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीण लंबे वक्त से पुल बनाने की मांग करते रहे। लेकिन उनकी मांग पर गौर नहीं किया जा रहा है। घुरचुम के ग्राम प्रधान मुकेश जोशी का कहना है कि पुल को लेकर वह कई बार जन प्रतिनिधियों व शासन प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। 2013 में लोक निर्माण विभाग ने क्वैराला नदी पर पुल बनाने के लिए सर्वे किया था। चार साल बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कोट
दो करोड़ रुपये की लागत से क्वैराला नदी पर 36 मीटर लंबा और तीन मीटर चौड़े पुल का सर्वे किया गया है। स्यूली से पाली जीआईसी तक मंडी समिति से बनी सड़क के चौड़ीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है। मोटर मार्ग का निर्माण पूर्ण होने के बाद ही पुल का आगणन बनाया जाएगा।
डीडी भट्ट, अधिशासी अभियंता,
लोक निर्माण विभाग, चंपावत डिवीजन।