चंपावत। चंपावत जिले में पहली नवरात्र से दिन में मंदिरों में भक्ति गूंजती थी और रात के समय रामलीला मंचन के जरिये संस्कृति, लोक कला और आस्था का प्रदर्शन होता था। इस बार रामलीला मंचन न होने से आयोजकों और किरदारों के साथ ही दर्शकों में मायूसी छाई है।
अभिनय और गायन के क्षेत्र में नन्हीं नई प्रतिभाओं पर भी ब्रेक लगा है। कई पेशेवर कलाकारों (निर्देशक, तबला, ढोलक, हारमोनियम वादक) की आजीविका पर भी मार पड़ी है। जिले में पिछले सालों तक नगरों और गांवों में 31 जगहों पर रामलीला का आयोजन होता था। आयोजकों का कहना है रामलीला न होने से बिजली, सजावट, टेंट हाउस के अलावा दूध, चाय, मूंगफली आदि के व्यवसाय से जुड़े लोगों के करीब 11 लाख रुपये के कारोबार पर चपत पड़ी है। संवाद
कोट
कोरोना महामारी के कारण लंबे अंतराल के बाद रामलीला मंचन पर रोक लगने से लोगों में मायूसी है। चंपावत की मल्लीहाट रामलीला कमेटी में मैं बीते डेढ़ दशक से लगातार रावण का किरदार निभा रहा हूं। प्रभु राम की कृपा से अगले साल तक महामारी का पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा।
अशोक वर्मा (रावण के किरदार)
रामलीला का आयोजन नहीं होना पीड़ादायक है, लेकिन कोरोना की वजह से स्थगित करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। इस बार लोहाघाट में पिछले साल हुई रामलीला की ऑनलाइन रिकार्डिंग को देखेंगे और पिछले साल अपने किरदार के गीतों को गुनगुनाएंगे।
जगदीश जोशी (दशरथ के किरदार)
राज्य बनने के बाद पहली बार फोर्ती में रामलीला का मंचन बाधित हुआ है। यहां की लीला में मैं कई किरदारों का अभिनय करने के साथ लगातार निर्देशन भी करता आ रहा हूं। इस बार रामलीला मंचन नवरात्र में घर में रामायण का पाठ करूंगा।
मोहन बगौली (रामलीला निर्देशक)।