अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी जो 75 वर्ष से एक ही स्थान पर रह रहे हैं, को वनाधिकारों की मान्यता दी जाएगी। साथ ही दावा पेश करने पर पट्टा निर्गत करने और उस वन गांव को राजस्व गांव घोषित किया जाएगा। इस ओर अब तक की गई कार्रवाई और दावों के निस्तारण में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के संबंध में शनिवार को सचिव समाज कल्याण डा.भूपिंदर कौर औलख ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की।
उन्होंने जिलाधिकारियों को 1930 से पूर्व से वन ग्रामों में रह रहे अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों को उनके दावा आवेदनों पर वन अधिकार समिति तथा उपखंड समिति की ओर से अब तक की गई कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि कई जिलों में जिला स्तरीय समिति की पट्टे आवंटित करने की संस्तुति के बाद भी वन निवासियों को समाज कल्याण विभाग ने पट्टे आवंटित नहीं किए हैं, जो तर्कसंगत नहीं है। डा.औलख ने कहा कि वनाधिकारों की मान्यता देने के लिए दावे में गजेटियर जनगणना, सर्वेक्षण, बंदोबस्त रिपोर्ट, मानचित्र, कार्य योजनाएं आदि को प्रस्तुत करना होगा।
प्रभारी जिलाधिकारी जेएस राठौर ने सचिव समाज कल्याण को बताया कि जनपद में 73 दावों की प्राप्ति हुई है, जिन पर उपखंड और वन अधिकार समिति ने उन्हें कमियों को दूर करने के लिए उपखंड को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि उपखंडों से कमियों के दूर होने और प्राप्त होने पर जिला स्तरीय कमेटी में दावों को प्रस्तुत कर स्वीकृत दावों पर पट्टे और अधिकार जारी किए जाएंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग में मोहन गिरि, दीपक गहतोड़ी आदि उपस्थित थे।