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...तो शिक्षण शुल्क में ही शामिल हैं कई दूसरे शुल्क!

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चंपावत। कोरोना काल में पिछले साल 22 मार्च से ज्यादातर वक्त स्कूल बंद रहे। इस दौरान पांचवीं तक के स्कूल तो एक दिन भी नहीं खुले। स्कूल बंद होने के चलते शासन ने शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) के अलावा अन्य शुल्क लेने पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन जिले में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां शिक्षण शुल्क में ही सारे शुल्क शामिल है। ऐसे में शिक्षण शुल्क देने के बावजूद छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। यहां तक कि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पिछले तीन माह के भीतर शुल्क भी बढ़ा दी गई है। इसे लेकर बुधवार को अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी भी जताई।
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चंपावत जिले के 110 निजी स्कूलों में से काफी स्कूल ऐसे हैं, जहां कोरोना काल से पहले से ही सिर्फ शिक्षण शुल्क ही लिया जाता है। इसी में विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कंप्यूटर, क्रीड़ा सहित कई अन्य शुल्क भी शिक्षण शुल्क में ही शामिल हैं। ऐसे में इन स्कूलों के छात्र-छात्राओं को सिर्फ शिक्षण शुल्क दिए जाने के बावजूद कतई राहत नहीं मिल रही है। जबकि शासनादेश के तहत मात्र ऑनलाइन या अन्य संचार माध्यमों से शिक्षण कराने वाले निजी स्कूलों को विद्यालय बंद रहने की अवधि में सिर्फ शिक्षण शुल्क लेने की अनुमति होगी। इसके अलावा अन्य किसी भी तरह का शुल्क अभिभावकों से नहीं लिया जाएगा। इसके मद्देनजर मंडलीय अपर निदेशक (माध्यमिक) रघुनाथ लाल आर्या ने इस संबंध में 24 मई को सभी जिला शिक्षाधिकारियों को पत्र भी भेजा है, जिसमें ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर जांच कर कार्यवाही करने के आदेश दिए गए हैं।
ट्यूशन फीस के नाम पर हो रही ठगी
अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को दिया ज्ञापन
चंपावत। क्षेत्र के लोगों ने कोरोना काल में भी निजी स्कूलों पर मनमाने ढंग से फीस वसूलने का आरोप लगाया है। क्षेत्र के लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक कार्यकर्ता हिमेश कलखुड़िया के नेतृत्व में बुधवार को इसे लेकर डीएम को संबोधित ज्ञापन एडीएम टीएस मर्तोलिया को सौंपा। ज्ञापन में प्राइवेट स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर लिए जा रहे अधिक शुल्क को वापस करने या इसे आगे समायोजित किए जाने की मांग की गई है।
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कहा गया कि कोरोना काल में पिछले साल मार्च से स्कूल बंद रहा, लेकिन इसके बावजूद शुल्क में कमी नहीं आई है। यदाकदा ऑनलाइन शिक्षण हुआ, लेकिन फिर भी ट्यूशन शुल्क के नाम पर पूरी फीस वसूली जा रही है। स्कूलों के ऐसे रवैये से अभिभावक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। ज्ञापन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी, मोहन सिंह, रमेश चंद्र, जगदीश सिंह, गिरीश जोशी, दीपन पंत आदि के हस्ताक्षर हैं।
निजी स्कूल शासन के आदेश और शिक्षा विभाग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। उनके संगठन से जुड़े कोई भी निजी स्कूल शिक्षण शुल्क के अलावा कोई अन्य फीस नहीं ले रहे हैं।
नवल किशोर तिवारी,
अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, चंपावत।
शिक्षण शुल्क के अलावा किसी अन्य तरह के शुल्क लेने के आरोपों की जांच की जाएगी। उच्चाधिकारियों के आदेश के क्रम में सभी चारों ब्लॉकों में शिक्षा अधिकारियों की टीमें बना जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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आरसी पुरोहित,
मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
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