हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर लोग।
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पहाड़ पर इन दिनों कड़ाके की ठंड हो रही है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को पानी के लिए पसीना बहाने को मजबूर होना पड़ रहा है। पर्याप्त पानी तो दूर, लोहाघाट सहित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हर रोज पानी ही नहीं मिल पाता। लोहाघाट में जल संस्थान एक दिन छोड़कर पेयजल की आपूर्ति करता है। ऐसे में मानक के अनुरूप शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर और गांवों में 70 लीटर पानी मिलना स्वप्न जैसा है।
जिले में हर परिवार को रोजाना औसतन मात्र 95 लीटर पानी ही मिल पा रहा है, जबकि कायदे से मिलना 200 लीटर चाहिए। चंपावत जिले के चार नगरीय क्षेत्रों में 81 लाख लीटर पानी की रोजाना जरूरत है, लेकिन उपलब्धता इस वक्त 43 लाख लीटर हो पा रही है। यानि रोजाना 37 लाख लीटर पानी कम मिल रहा है। शहरी क्षेत्रों में सर्वाधिक किल्लत लोहाघाट नगर में है। चार नगरीय योजनाओं के अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 281 छोटी योजनाएं हैं। मगर स्रोतों में कमी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। लोहाघाट, चंपावत, बाराकोट और पाटी क्षेत्र में इस ठंड में भी लोग पानी के लिए 753 हैंडपंपों के अलावा नौले और गधेरों से काम चलाने को मजबूर हैं।
इधर, ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल स्रोतों में कमी के अलावा लीकेज, अतार्किक वितरण सहित कई कारण ऐसे हैं, जिनसे पानी की समुचित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। और नतीजा यह हो रहा है कि लोग 100 मीटर से एक किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं।
पेयजल स्रोत में आ रही कमी से पेयजल की आपूर्ति में गिरावट आ रही है। विभाग वैकल्पिक उपाय कर इस कमी की भरपाई करने का प्रयास कर रहा है। मगर चंपावत की क्वैराला पुनर्गठन पेयजल योजना के पूरा होने के बाद हालात बेहतर हो सकेंगे।
- बिलाल यूनुस, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।