उपयोग का इंतजार करता टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर।
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चंपावत। मझेड़ा की हेमा दो साल पहले पेड़ से गिरने से घायल हो गई थी। समय पर इलाज नहीं मिलने से ऊधमसिंह नगर जिले के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वक्त पर इलाज नहीं मिलने से जिंदगी गंवाने की यह बानगी भर है। जिले में पिछले चार साल में सड़क हादसों, पहाड़ी से गिरने या दूसरी दुर्घटनाओं में घायल करीब 70 लोगों की समय पर इलाज न मिलने मौत हो चुकी है। ये हाल तब हैं, जबकि इस जिले में आपात कालीन चिकित्सा की सुविधा के लिए दो ट्रॉमा सेंटर हैं। लेकिन ये सेंटर चालू हालत में नहीं होने से लोगों के किसी काम के नहीं है।
आपात सेवा में कारगर इलाज देने के लिए 2016 में बने टनकपुर और लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। 2.02 करोड़ रुपये के इन केंद्रों का अभी तक संचालन भी नहीं हो सका है। लोगों को इमरजेंसी में इलाज के लिए 200 किमी दूर हल्द्वानी या दूसरे अस्पतालों में दौड़ लगानी पड़ रही है। समय पर इलाज न मिलने कई घायलों को जिंदगी गंवानी पड़ रही है।
इसलिए नहीं हो पा रहा है संचालन
चंपावत। हादसों में अधिक रक्तस्राव, बेहोशी और इसी तरह के दूसरे मामलों में हर पल बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में वक्त पर इलाज से जिंदगी बचने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन यहां के दोनों ट्रॉमा सेंटर संचालित नहीं हो सके हैं। दोनों सेंटरों में सर्जन, निश्चेतक, न्यूरो सर्जन सहित डॉक्टरों के 12 और पैरा मेडिकल स्टाफ के 21 पदों में से किसी की तैनाती नहीं हो सकी है। सेंटर को संचालित करने के लिए उपकरण भी नहीं मिल पाए हैं। ब्यूरो
आइसोलेशन वार्ड लायक भी नहीं टनकपुर ट्रॉमा सेंटर
चंपावत। लोहाघाट का ट्रॉमा सेंटर इस वक्त कोरोना संक्रमितों के लिए आइसोलेशन वार्ड के रूप में काम आ रहा है, लेकिन टनकपुर के सेंटर की स्थिति ऐसी भी नहीं है। टनकपुर ट्रॉमा सेंटर में बीते डेढ़ महीनों से कोरोना संक्रमितों को भी नहीं रखा जा रहा है। भवन में आई छिटपुट खामी की वजह से इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ब्यूरो
×जिले के दोनों ट्रॉमा सेंटर में इलाज की सुविधा अभी नहीं है। ये इस वक्त कोरोना के आइसोलेशन के रूप में काम आ रहे हैं। लोहाघाट ट्रॉमा सेंटर के लिए 33 पदों का सृजन हुआ है, लेकिन स्टाफ नर्स को छोड़ किसी की तैनाती नहीं हुई है। वहीं टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर के पदों का सृजन नहीं हुआ है।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।