शिक्षा विभाग के मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन ने स्थानांतरण से पहले सुगम-दुर्गम का निर्धारण करने की मांग की है। विसंगति का आरोप लगाते हुए संगठन ने अपर शिक्षा निदेशक को ज्ञापन भेजा है। कहा गया कि निदेशालय स्तर के श्रेणीकरण में लोहाघाट को दुर्गम तथा जीजीआईसी काकड़ को सुगम दर्शाया गया है, जबकि न लोहाघाट दुर्गम है और नहीं काकड़ सुगम।
कहा गया है कि अनिवार्य स्थानांतरण के तहत कनिष्ठ और वरिष्ठ सहायकों से विकल्प पत्र मांगे गए हैं, लेकिन स्थानांतरण से पूर्व सुगम-दुर्गम का स्पष्ट निर्धारण नहीं किया गया है, जिससे प्रत्येक कार्मिक को अपने स्थानांतरण के लिए इच्छित विकल्प प्रस्तुत करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहा गया है कि जिन विद्यालयों को शिक्षकों के लिए सुगम घोषित किया गया है, वही विद्यालय मिनिस्ट्रीयल कार्मिकों के लिए दुर्गम दर्शाया गया है।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नागेंद्र जोशी और मंत्री रवींद्र पांडेय द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शिक्षकों के श्रेणीकरण के आधार पर मिनिस्ट्रीयल कार्मिकों का श्रेणीकरण किया गया तो दोनों स्थलों में सुगम-दुर्गम में अंतर कतई न्याय संगत नहीं है। न तो लोहाघाट दुर्गम है और न ही काकड़ सुगम। इस तरह की अनेक विसंगतियां स्थान कोटिकरण में है। एसोसिएशन ने कहा कि एक ओर शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए काउंसलिंग की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ मिनिस्ट्रीयल कर्मियों के साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है।