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नशे की तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है चंपावत जिला

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चंपावत के फुलारागांव में स्थित देवभूमि नशामुक्ति केंद्र। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। नशे की तस्करी का नया गढ़ बनता जा रहा है चंपावत जिला। आलम ये है कि बढ़ी संख्या में यहां के युवा चरस, स्मैक, शराब, तंबाकू अफीम की तस्करी के साथ खुद भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
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जिला मुख्यालय के फलारागांव में संचालित देवभूमि नशा मुक्ति केंद्र में पिछले तीन सालों में 75 युवा नशा छोड़ने के लिए आए।
इनमें से अधिकतर लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र के संचालक दीपक जोशी ने बताया कि अधिकतर युवा 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। नशा मुक्ति केंद्र में अपना इलाज करा रहे पांच युवा तो 17 से 25 वर्ष की उम्र के हैं। ज्यादातर नशेड़ी स्मैक और चरस के लती होते हैं। कुछ युवा नशे का इंजेक्शन तक लेने लगे थे। स्मैक, ड्रग्स के लती व्यक्ति को छह महीने तक नशा मुक्ति केंद्र में रहना पड़ता है, जबकि शराब के नशेड़ियों को तीन माह रहना होता है। हालांकि यहां से जाने के बाद भी संबंधित व्यक्ति कुसंगत में फंसकर दोबारा नशा कर सकता है। इससे बचने के लिए परिजनों को भी ध्यान देने की जरूरत है। (संवाद)
पिछले साल रिकॉर्ड तोड़ 87 किलो चरस बरामद की
चंपावत। जिले में वर्ष 2019 में स्मैक, चरस और अफीम तस्करी के 66 मामले दर्ज होने के साथ इतने ही लोगों की गिरफ्तारियां भी हुईं। पुलिस ने पकड़े गए लोगों से 35 किलो चरस, 98 ग्राम स्मैक और दो किलो अफीम जब्त की। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 87 पहुंच गया, इनमें 80 गिरफ्तारियां हुईं। रिकॉर्ड तोड़ 87 किलो चरस और 80 ग्राम स्मैक पकड़ी गई। शराब तस्करी में वर्ष 2020 में 100 मामलों में 100 आरोपी दबोचे गए। इन आरोपियों के पास से अंग्रेजी शराब की 4,71,700 बोतलें, देसी शराब की 4,08,100 बोतलें, कच्ची शराब की 430 बोतलें और नेपाली शराब की 138 बोतलें पकड़ी गईं। (संवाद)
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