सूबे के सबसे छोटे जिलों में शुमार चंपावत ने राष्ट्रीय बचत में शानदार प्रदर्शन किया है। इस छोटे जिले ने बचत में बड़ी उछाल मारी है। जिले ने बीते वित्त वर्ष में लक्ष्य से 205 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। बचत विभाग को बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय बचत में ए श्रेणी हासिल हुई है।
चंपावत जिला प्रदेश के सबसे कम आबादी वाले जिलों में है, मगर यह दीर्घकालीन बचत करने में आगे हैं। जिला बचत अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व देख रहे डीएसटीओ नंदाबल्लभ बचखेती ने बताया कि 2016-17 के वित्तीय वर्ष में जिले ने 21.30 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 43.74 करोड़ (205 प्रतिशत) लक्ष्य हासिल किया।
हालांकि 2015-16 में बचत का आंकड़ा इससे भी बेहतर था। 21.30 के सापेक्ष 48.11 करोड़ लक्ष्य हासिल किया था। उद्योगविहीन और खेती में फिसड्डी इस जिले की कारोबारी स्थिति खासी कमजोर है। बचत का यह आंकड़ा जिले की कमजोर माली हालत और विभागीय टोटे के बावजूद अर्जित होना किसी उपलब्धि से कम नहीं है।
चंपावत में जिला बचत अधिकारी की कुर्सी बीते दो वर्षों से खाली पड़ी है। पूरा विभाग महज एक बाबू नरेश सिंह के सहारे चल रहा है। विभागाध्यक्ष का पद भी 2012 से रिक्त हैं। इसके अलावा एडीएसओ और संख्या सहायक के पद भी रिक्त है।
विकास के लिए महत्वपूर्ण है राष्ट्रीय बचत
उत्तराखंड राज्य की विकास योजनाओं के लिए राष्ट्रीय बचत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार बचत की जमा राशि का शत-प्रतिशत राज्यों को कर्ज के रूप में देती है। कुल दीर्घकालिक जमा का 100 प्रतिशत केंद्र सरकार राज्यों को विकास कार्यों के लिए देती है।
चंपावत जिले में बचत की प्रगति का ब्यौरा
वर्ष लक्ष्य उपलब्धि (करोड़ रुपये में)
2013-14 10.30 27.15
2014-15 19.35 34.21
2015-16 21.30 48.11
2016-17 21.30 43.74