इस साल बारिश नहीं होने और सूखे ने चंपावत जिले में किसानों की कमर तोड़ दी है। सूखे के चलते मटर, प्याज और लहसुन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को 2 करोड़ 16 लाख की चपत लगी है। उद्यान विभाग ने नुकसान का आकलन कर जानकारी उद्यान निदेशक को भेज दी है।
साल 2016 के 43 दिनों में महज 10 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में करीब 105 एमएम बारिश हुई। जबर्दस्त सूखे ने यहां बागवानी पर बुरा असर डाला है। मटर, प्याज और लहसुन की फसल पर जबर्दस्त तबाही मची है। 30 से 40 प्रतिशत तक फसलों का नुकसान हुआ है। वैसे जिले में मटर, प्याज और लहसुन पर सूखे की पैदावार ठीकठाक होती है। 152 हेक्टेयर क्षेत्र में 419 मीट्रिक टन में मटर, 70 हेक्टेयर में 549 एमटी प्याज और 320 हेक्टेयर में 740 एमटी लहसुन की पैदावार पिछले साल हुई, मगर इस बार इन फसलों पर जबर्दस्त मार पड़ी है।
जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी ने बताया कि कम बारिश और कम हिमपात के चलते 152 हेक्टेयर (40 प्रतिशत) मटर, 70 हेक्टेयर (35 प्रतिशत) प्याज और 95 हेक्टेयर (30 प्रतिशत) लहसुन के नुकसान का अनुमान है। नुकसान के आकलन की जानकारी उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशक को दी गई है। उधर किसानों ने सूखे से राहत दिलाने के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग की है।
घाव पर मरहम लगाए सरकार
सूखे मौसम ने यहां किसानों की मेहनत पर पानी फेरा है। किसान प्रकाश सिंह, त्रिलोक सिंह, सुंदर सिंह एवं मोहन राम का कहना है कि मटर, प्याज और लहसुन की फसल बर्बाद होने से किसान बेहाल हो रहे हैं। बीज, खाद में ही उन्होंने हजारों रुपये खर्च कर डाले, मगर बारिश नहीं होने से ये फसल बुरी तरह से तबाह हो गई। कृषि बीमा योजना नहीं होने के चलते इन किसानों को भी लाभ नहीं मिलेगा। किसानों ने बढ़ी हुई दरों पर मुआवजे के साथ ही कर्ज माफ करने की मांग की है।
सब्जी प्रभावित क्षेत्रफल (प्रतिशत) प्रभावित उत्पादन (एमटी) नुकसान रकम (लाख रुपये)
मटर 152 40 480 144
प्याज 70 35 192 28.80
लहसुन 95 30 222 88.80
योग 317 36.5 894 216.60