सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश करने के साथ ही बैठकी होलियों का दूसरा दौर शुरू हो गया है। मस्टा संगीत कला समिति के सौजन्य में शिक्षक रवीश पचौली के आवास पर हुई बैठकी होली में होल्यारों ने देर रात तक समां बांधा।
संगीत प्रवीण चतुर सिंह मौनी ने राग सिंध काफी में रघुवर देखी जनक दुलारी... गीत से शुरुआत की। एलएम सोराड़ी ने इसी राग में भगवान योगीराज की आराधना करते हुए अबकी बेर हमारी लाज रखो गिरधारी... आचार्य केसी भट्ट ने इसी राग में होली को आगे बढ़ाते हुए लोगों वृंदावन नीको, श्याम बिन सब जग फीको... गीत गाकर महफिल को भक्तिमय बना दिया। एमसी भट्ट ने इसी राग में क्या जिदंगी का ठिकाना, समझ मन क्यों रे भुलाना... बीसी भट्ट ने वन को चले दो भाई उन्हें समझावत नाहीं...
ललित सोराड़ी ने राग सहाना में कहत निषाद सुनो रघुनंदन, नाथ न लूं तुमसे उतराई... कैलाश भट्ट ने झिंझोटी में श्याम सुंदर बनवारी, अब जाऊं में तो पे वारी... महेश भट्ट ने राग देश में चलो चलो होली खेलने जमुना तट की ओर गीत की शानदार प्रस्तुति दी। देर रात तक चली इस महफिल में बीआर सोराड़ी, नरेंद्र गहतोड़ी, पंकज पचौली, एमएन पचौली, दिवाकर संदीप, तन्मय आदि ने सुर में सुर मिलाया। तबले में सौरभ अवस्थी, दीपक अधिकारी, अंकित भट्ट ने ताल ठोकी।