क्षेत्र में इन दिनों बैठकी होली के गायन की धूम है। शनिवार रात जिला मुख्यालय में कारोबारी भगवत शरण राय के आवास पर कलश संगीत कला समिति के तत्वावधान में होली गायन हुआ। सब दु:ख दूर करो हे गणपति, हे विघ्नविनाशक... से होली गीत का श्रीगणेश हुआ।
डा.वीके पाठक ने राग काफी में आयो नवल वसंत सखी ऋतुराज कहाए होली गीत गाया। रिटायर्ड शिक्षक धर्म सिंह अधिकारी गाओ सुहागन होरी, बरस की घड़ी अलबेली, गाओ सुहागिन होली, अबीर-गुलाल उड़त खुशियों के गीत पेश किया। प्रकाश पांडेय ने क्या जिंदगी का ठिकाना, फिरत मन क्यों रे भुलाना। क्या जिंदगी का ठिकाना, कहां गये भीमा, कहां दुर्योधन, होली गीत से समां बांधा। दिनेश बिष्ट ने श्याम ने मोरी सुध बिसराई। अभी न आये द्वारिका छाये, मो सन रार मचाई, गिरीश चंद्र पंत ने कैसी बंशी बजाई तोरे कान्हा ने लरक, कैसी मुरली बजाई तोरे कान्हा ने लरक, तुलसी दत्त जोशी ने अपने ही रंग का दीवाना रे कान्हा, होली खेलत मोसे करके बहाना होली गीत पेश कर रंग जमा दिया।
शिक्षक उमापति जोशी ने ये कैसी होरी खेलाई, श्याम तुम बड़े हरजाई, तुम बड़े हरजाई, ये कैसी होरी खेलाई, सबको मुबारक होली गीत से रंग बिखेरे, आदि गीत भी सुनाए गए। इस मौके कमलेश राय, मुकुल राय, ललित पंत, भगवत शरण राय, ऋषभ राय, जगदीश पचौली, रमेश डिक्टिया, धीरेंद्र कुमार राय आदि मौजूद थे।