चार दिन बाद गणतंत्र के 66 साल पूरे हो जाएंगे। गणतंत्र की अवधारणा हो या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सपना, दोनों पंचायतीराज से जुड़ा है, मगर त्रिस्तरीय पंचायतों के सबसे पहले पड़ाव ग्राम पंचायतों के हाल भी इस पूरे दौर में गर्व करने लायक नहीं बन सके। स्वराज को अहम माने जाने वाले पंचायतीराज की इस बुनियाद के ढांचे में कमी है। चंपावत जिले में ही ढेरों ग्राम पंचायतों के हाल जर्जर है। आवासहीनों को छत मुहैय्या कराने वाली ग्राम पंचायत खुद अपनी छत को तरस रही है।
जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से एक के पास भी फोन की सेवा नहीं है। फर्नीचर और दूसरी जरूरी सुविधाओं से भी वे मोहताज हैं, मगर 23 ग्राम पंचायतों के पास तो अपने भवन भी नहीं है। ऐसे में इन्हें अपने कार्यालय चलाने के लिए भी उधारी की जगह तलाशनी पड़ रही है। इन पंचायतों को काम करने के लिए दूसरे ठिकाने का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। बेघरों को घर देने वाली इन 23 ग्राम पंचायतों के पास अपने घर (पंचायतघर) ही नहीं है। और तो और कलक्ट्रेेट से लगी ढकनाबड़ोला ग्राम पंचायत के हाल भी निराले हैं। इस पंचायत के पास अपना दफ्तर (पंचायतघर) नहीं है। खुली बैठकों के अलावा राशनकार्ड, इंदिरा आवास, मनरेगा, परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, एमडीएम से लेकर तमाम विकास कार्य ग्राम पंचायतें ही संचालित करती है।
पंचायत भवन विहीन ग्राम पंचायतें और आबादी
1.कठनौली 295
2.ढकनाबड़ोला 975
3.पुनेठी 430
4.बिचई 1375
5.भजनपुर 1117
6.मंच 456
7.मोहनपुर 2569
8.शक्तिपुरबुंगा 894
9.गैड़ाख्याली नंबर 3 1062
10.कांडा डोला 450
11.सायली 305
12.नायल 358
13.टनकपुर 3367
14.हरम 340
15.सिमल्टा 393
16.ओखलंज 122
17.सुदर्का 434
18.राईकोट महर 364
19.चौड़ामेहता 268
20.टाकबल्वाड़ी 260
21.कनवाड़ 369
22.थापलागूंठ 207
23.मौनकांडा 1083
बुरे हाल में हैं कई भवन वाली पंचायतें
भवनहीन पंचायतों की तरह धूरा ग्राम पंचायत के भवन के हाल भी खस्ता हैं। प्रधान लक्ष्मी देवी का कहना है कि बेहद जर्जर भवन में काम करना चुनौती बन रहा है। इसके अलावा चौड़ासेठी सहित कई पंचायतघर ठीक हाल में नहीं है। टनकपुर की तीन ग्राम पंचायतों (मोहनपुर, टनकपुर और ज्ञानखेड़ा) का काम एक ही पंचायतभवन में हो रहा है।
पंचायत भवन में चल रहा बनबसा जीजीआईसी
कहीं-कहीं तो पंचायत भवन में दूसरे काम हो रहे हैं। बनबसा ग्राम पंचायत के पास पंचायतघर तो है, लेकिन इसमें उसका दफ्तर नहीं चल रहा है, बल्कि बनबसा का राजकीय बालिका इंटर कॉलेज चल रहा है। ग्राम पंचायत की खुली बैठक यहां मैदान या अन्यत्र की जाती है।
पंचायतघर नहीं होने से ग्राम पंचायत का काम स्कूल या मंदिर में करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पंचायतघर भवन को निशुल्क जमीन देने को गांव के लोग तैयार हैं। भवन का प्रस्ताव भी रखा गया है। -विनोद सिंह, ग्राम प्रधान, ढकनाबड़ोला (कलक्ट्रेट के पास की पंचायत)।
जिले में 23 ग्राम पंचायतों के पास अपने भवन नहीं है। इस वजह से जरूरी कामकाज निपटाने में पंचायतों को परेशानी हो रही है। पंचायत भवनों के लिए दो नाली निशुल्क जमीन को पंचायत के नाम रजिस्टरी करना जरूरी है। पंचायतों के भवन के लिए प्रस्ताव निदेशालय भेजे गए हैं। - सुरेश बेनी, जिला पंचायतराज अधिकारी।