वर्तमान में जहां पर्वतीय क्षेत्र के दूरस्थ गांवों और कस्बों में सेवा करने से डॉक्टर कतराते हैं, ऐसे में बिहार के आरा जिले के मूल निवासी डॉ. एके सिंह ने अपनी सेवा का अधिकांश समय उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मरीजों को समर्पित किया है। 67 साल की उम्र में भी वह मरीजों की सेवा को अपना धर्म मानते हैं।
गंगोलीहाट में तैनाती के दौरान उन्होंने एक बार एक मरीज की जान बचाने के लिए 40 किमी की पैदल दूरी तय करने में भी गुरेज नहीं किया। इसके अलावा पंचेश्वर और रेगडू में संक्रामक महामारी फैलने पर उन्होंने दिन-रात मरीजों का इलाज कर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया।
वर्ष 1980 में एमबीबीएस पूर्ण करने वाले डॉ.सिंह चार साल तक भारतीय सेना की मेडिकल कोर में तैनात रहे। उसके बाद वर्ष 1987 में पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी स्वास्थ्य केंद्र में तैनात रहे। इसके बाद गंगोलीहाट, लोहाघाट में सेवा करने के बाद वर्ष 2013 में वह यूपी के अमरोहा में सीएमओ रहे तथा सितंबर 2014 में सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के आठ माह बाद उन्होंने फिर से संविदा में चंपावत में बतौर चिकित्सक ड्यूटी ज्वाइन की। इस दौरान उन्होंने खेतीखान, देवीधूरा के साथ लोहाघाट अस्पताल में अपनी सेवाएं दी। वर्तमान में वह अपने डॉक्टर पुत्र आभाष सिंह और बहू के साथ पाटी में निवास कर मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
मिलम और कैलाश मानसरोवर यात्रा में कर चुके हैं ड्यूटी
पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी तहसील में आठ माह की तैनाती के दौरान डॉ. एके सिंह मिलम ग्लेशियर और कैलाश मानसरोवर यात्रा में भी ड्यूटी कर चुके हैं। इस दौरान प्राकृतिक आपदा के कारण संपर्क मार्ग बंद होने से उन्हें काफी दूरियां पैदल तय करनी पड़ी।
अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविर में दिया रक्त
चंपावत। डॉ. एके सिंह ने 67 साल की आयु के बावजूद अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 14 जून को आयोजित रक्तदान शिविर में 70 किमी दूर पाटी से जिला मुख्यालय पहुंचकर रक्तदान कर अन्य लोगों के लिए समाज सेवा का संदेश दिया।