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कभी गुलजार रहने वाले चर्च में पसरा रहता है सन्नाटा

Sun, 24 Dec 2017 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
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खंडहर में तब्दील होता जा रहा लोहाघाट के एबटमाउंट में स्थित चर्च। - फोटो : अमर उजाला
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लोहाघाट से तकरीबन सात किलोमीटर दूर खूबसूरत इलाका है एबटमाउंट। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध इस इलाके की पहचान एक ऐतिहासिक चर्च से भी है। क्षेत्र के एकमात्र चर्च भले ही अब खामोशी के आगोश में है, लेकिन आजादी से पहले ब्रिटिश राज में यह खूब गुलजार रहता थी।

प्रकृति प्रेमी हैराल्ड एबट ने 1910 में एबटमाउंट की जमीन लीज पर लेने के बाद अन्य अंग्रेजों को बसाने का काम किया था। तब यहां अंग्रेजों की जमकर आवाजाही होती थी। छीड़ापानी की फुलगढ़ी की मैथोडिस्ट चर्च के पास्टर सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि एबट ने 1930 में अपनी पत्नी की स्मृति में चर्च का निर्माण किया था। उस वक्त इसमें सिर्फ अंग्रेज ही प्रार्थना कर सकते थे। तब वहां प्रतिदिन प्रार्थना हुआ करती थी। बाद में इस चर्च को एंग्लो इंडियन लोगों के लिए भी खोल दिया गया।
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मगर आजादी मिलने के बाद यहां अंग्रेजों की आवाजाही कम हो गई। हैरल्ड एबट के जीते जी तक भी यह चर्च गुलजार रहता था। बाद में इसके रखरखाव की जिम्मेदारी बनबसा के स्ट्रांग को सौंपी गई। स्ट्रांग के जीते जी बनबसा से काफी लोग यहां आते थे। क्रिसमस के मौके पर विशेष रूप से यहां पूरे उल्लास के साथ त्यौहार की खुशियां मनाई जाती थी। मगर उनकी मौत के बाद यहां धीरे धीरे लोगों की आवाजाही कम होती गई। आज स्थिति यह है कि इस 87 साल पुराने इस चर्च में क्रिसमस डे के दिन भी सूनसानी छाई रहती है।
 
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