बार्डर की सुरक्षा के साथ ही एसएसबी की 57वीं वाहिनी सामुदायिक कल्याण कार्यक्रम के तहत सीमांत गांवों में जनकल्याण की दिशा में बेहतर काम कर रही है। इसी क्रम में मनिहारगोठ में एक माह तक चले सिलाई प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हो गया। प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने वाली 15 महिलाओं और युवतियों को सिलाई मशीनें भेंट की गई।
एसएसबी के कमांडेंट केसी राणा ने कहा कि सीमा सुरक्षा के साथ ही एसएसबी सीमांत क्षेत्रों में मानव विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों में निष्ठा के साथ भागीदारी निभाई रही है। एसएसबी का उद्देश्य न सिर्फ सीमा सुरक्षा बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का उत्थान करना भी है।
उन्होंने कहा कि 1963 में स्थापित स्पेशल सर्विस ब्यूरो (एसएसबी) का गठित हुई। भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी बखूबी निभाती आई है। उन्होंने कहा कि 2013 में भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिलने के बाद 57वीं वाहिनी द्वारा मानव विकास और जनकल्याण की दिशा में बेहतर काम किया जा है।
समय-समय पर ग्रामीणों को मानव चिकित्सा और पशु चिकित्सा की सुविधा देने के साथ ही शिक्षा, असहायों की मदद, आजीविका के प्रशिक्षण, बालक-बालिकाओं को शैक्षिक भ्रमण कराने जैसे कई कल्याणकारी कार्य किए गए हैं। ग्राम प्रधान अमजद हुसैन की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सिलाई मशीन वितरण के साथ ही विद्यालय को शिक्षण सामग्री व किसानों को कृषि यंत्र भी वितरित किए। इस मौके पर शिक्षक गिरीश चंद्र, एसएसबी के निरीक्षक विनोद कुमार आदि मौजूद थे।