पुलिस और राजस्व की टीम मौके को रवाना
चंपावत के एसडीएम का पता लगने के बाद यहां से एक टीम उन्हें लेने के लिए शिमला रवाना हुई है। हालांकि प्रशासन इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर रहा है लेकिन भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि पुलिस के एक दरोगा और दो राजस्व उपनिरीक्षकों की टीम यहां से रवाना हुई है।
चंपावत का जिम्मा फिलहाल लोहाघाट के एसडीएम को
एसडीएम के लापता होने के बाद से सोमवार से एसडीएम कार्यालय में उहापोह की स्थिति रही। अलबत्ता उनके शिमला में होने की जानकारी के बाद मंगलवार को कार्यालय में आवाजाही बनी रही। वहीं अनिल चन्याल के आने तक लोहाघाट की एसडीएम रिंकू बिष्ट को चंपावत की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही पहाड़ की चारों तहसीलों का दायित्व एक एसडीएम के कंधों पर आ गया है। पाटी में इस माह के शुरू से एसडीएम नहीं है। बाराकोट में एसडीएम का पद ही सृजित नहीं है। इन दोनों क्षेत्रों की जिम्मेदारी लोहाघाट की एसडीएम के पास थी और अब इसमें चंपावत भी जुड़ गया है। जिले की पांचवीं तहसील मैदानी क्षेत्र टनकपुर में है जहां एसडीएम के रूप में हिमांशु कफल्टिया की तैनाती है।
कई सवाल जो कर रहे परेशान...
पीसीएस अधिकारी अनिल चन्याल के अचानक स्टेशन छोड़ चले जाने से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा रहा। प्रशासन ने उनसे फोन पर हुई बात के आधार पर बताया कि काम की अधिकता और दबाव की वजह से चन्याल मानसिक रूप से परेशान थे। इसके चलते वे विश्राम और इलाज के लिए यहां से चले गए, लेकिन उनके जाने का तरीका पहेली बना हुआ है। इससे कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
- वे अकेले गए या परिवार के किसी सदस्य के साथ गए या अन्य किसी के साथ गए?
- एसडीएम के दोनों वाहन (सरकारी और निजी कार) चंपावत में थे ऐसे में वे किस वाहन से गए?
- स्वास्थ्य लाभ के लिए शिमला जाने पर इलाज कराया या आबोहवा के बदलाव से मानसिक शांति प्राप्त की?
- आखिर यहां से जाने से पहले उन्होंने फोन या मैसेज कर स्टेशन छोड़ने की जानकारी क्यों नहीं दी?
11 की दोपहर ही निकल गए थे...
एसडीएम चन्याल के पास काफी समय से जिला पूर्ति अधिकारी की भी जिम्मेदारी है। कहा जा रहा है कि भले ही उनके चंपावत से बाहर होने की जानकारी 12 सितंबर को मिली, लेकिन वे 11 सितंबर दोपहर दो बजे के बाद किसी समय निकल गए थे। चन्याल चंपावत में अकेले रहते हैं। उनका परिवार हल्द्वानी में रहता है। डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि कार्य की अधिकता और काम के दबाव से एसडीएम चन्याल को मानसिक स्वास्थ्य लाभ की जरूरत हुई हो। इस संबंध में उनसे वार्ता की जाएगी।
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जिले में नहीं है मनोचिकित्सक
चंपावत। जिले में मानसिक स्वास्थ्य के इलाज की व्यवस्था नहीं है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि जिले में एक भी मनोचिकित्सक नहीं है। अलबत्ता एनएचएम के जरिये मनोवैज्ञानिक परामर्श देते हैं। अवसाद की वजह ज्यादा काम, पारिवारिक दिक्कतें, आधुनिक जीवनशैली, खानपान आदि हैं।