चंपावत की मासिक काव्य गोष्ठी में कविता करते कवि।
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चंपावत। साहित्य चेतना मंच की ओर से रविवार को हुई मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने मौजूदा हालात में विविध रंग भरे। युवा कवि हिमांशु जोशी ने ‘समय सभी को देखता, रहता फिर भी मौन, भला समय के फेर से बच पाया है कौन’ रचना पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. बीसी जोशी ने रोजी -रोटी में जुटे इंसान की व्यथा यूं पेश की ‘दो जून की रोटी से जुड़ पूरा समय गुजर गया, कब तक मैं जीवित रहा और कब में मर गया’ कविता पेश की। सेवानिवृत्त ग्राम्य विकास विभाग कर्मी सुभाष चंद्र जोशी ने ‘तुमने अद्भुत सृष्टि बनाई, महाव्योम सिर पर फैलाया’, राम प्रसाद आर्य ने ‘कवि था वो ऐसा रवि था, काव्य किरण जिसके जग जग मग था..’, रचना पेश की। काव्य गोष्ठी में नीरज जोशी, कोमल पांडेय, मयंक जोशी आदि मौजूद थे। गोष्ठी के अंत में दो हफ्ते पूर्व दिवंगत हुए साहित्यकार और सेवानिवृत्त शिक्षक फणींद्र कुमार पांडेय के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।