शीलादेवी मंदिर के पुजारी राजेंद्र कोटिया।
- फोटो : AMAR UJALA
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। लधिया घाटी के प्रसिद्ध शीलादेवी मंदिर में अब किसी तरह का बलिदान नहीं होगा। अब तक यहां लोग मन्नत पूरा होने पर बकरे की बलि चढ़ाते थे। बलि नहीं चढ़ाने का फैसला शुक्रवार को मंदिर कमेटी की बैठक में लिया गया। कमेटी के अध्यक्ष जगत सिंह बगौटी की अध्यक्षता और लक्ष्मण सिंह भंडारी के संचालन में हुई बैठक में किसी भी तरह की बलि चढ़ाने पर रोक लगा दी गई है। बलिदान के पूर्ण बंदी को लेकर 15 फरवरी 2021 को फिर बैठक होगी। बता दें कि लधिया घाटी का पुरातन शीलादेवी मंदिर की मछियाड़, चौड़ापिता, कुल्यालगांव, रीठा साहिब, साल, मेलाचौक आदि गांवों में जबर्दस्त मान्यता है। साथ ही अगले एक साल के लिए मौजूदा पुजारी राजेंद्र कोटिया को ही मंदिर में पूजा का दायित्व सौंपा गया है। बैठक मे मंदिर कमेटी के लिए दीवान बड़ेला को अध्यक्ष, पुष्कर सिंह कोषाध्यक्ष, लक्ष्मण सिंह भंडारी उपाध्यक्ष और दीपक जोशी, नरेश जोशी, पंकज जोशी, रमेश बड़ेला, उत्तम सिंह भंडारी, देव सिंह, दीवान राम, लक्ष्मण राम को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है।
लधिया घाटी का प्रसिद्ध शीलादेवी मंदिर।
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लधिया घाटी का प्रसिद्ध शीलादेवी मंदिर।