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सूखे से रबी की फसल पर मंडराया संकट

Wed, 17 Jan 2018 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
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बारिश नहीं होने से लोहाघाट के खेतों में बर्बाद गेहूं की फसल। - फोटो : अमर उजाला
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 चंपावत जिला इस बार सूखे की चपेट में है। रबी की फसल पर भारी संकट मंडरा रहा है। पिछले साल दिसंबर में हुई 8 मिलीमीटर बारिश को छोड़ दिया जाए, तो बरसात के बाद से एक बूंद पानी खेतों तक नहीं पहुंचा है। गेहूं, जौ, लाई, सरसों, पालक, मैथी, मटर, प्याज और लहसुन सहित कई फसलें बर्बादी के कगार पर है। इसके बावजूद अभी तक सूखे का सर्वे पूरा नहीं हो सका है। कृषि विभाग का कहना है कि संयुक्त सर्वे पूरा होने में अभी करीब एक सप्ताह और लगेगा।
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चंपावत जिले में करीब 8300 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसल की बुवाई की गई है। रबी की फसल में मुख्य रूप से गेहूं की खेती होती है, लेकिन इस वक्त जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा को छोड़ अधिकांश हिस्सों में गेहूं की फसल जम नहीं पाई है। मुख्य कृषि अधिकारी एस कुमार का कहना है कि बारिश नहीं होने से कई जगहों में गेहूं जम नहीं पाए हैं। अलबत्ता राजस्व, कृषि व उद्यान विभाग की संयुक्त टीम सूखे की तीव्रता और इससे होने वाले नुकसान को लेकर सर्वे कर रही है। सर्वे का ब्यौरा एक सप्ताह बाद मिल सकेगा। वहीं जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या का कहना है कि सूखे की भयावहता और मिट्टी में नमी की कमी से आलू की फसल से लेकर विभिन्न सब्जियों के उत्पादन पर भारी असर पड़ने का अंदेशा है। 30 प्रतिशत से अधिक नुकसान का मोटा अनुमान है।

पहाड़ में सिंचाई के साधन नगण्य होने से खेती बर्बादी के मुहाने पर है। चंपावत जिले में सिर्फ मैदान क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में ट्यूबवेल से लेकर नहर तक की व्यवस्था है। जिस कारण यहां बारिश नहीं होने पर सिंचाई के इन साधनों से खेती को नुकसान कम हो रहा है।
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काश्तकारों के चेहरों में मायूसी छाई
बारिश नहीं होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। काश्तकारों का कहना है कि बैंक, समितियों या अन्य लोगों से कर्ज लेकर मंहगे गेहूं व साक-भाजी की फसलों की बुवाई की, लेकिन बारिश नहीं होने से खेत बंजर पड़े हुए हैं। काश्तकारों का कहना है कि रही सही कसर पाले ने पूरी कर दी है। भारतीय किसान यूनियन ने सूखे से हुए नुकसान का 26 जनवरी तक सर्वे पूरा नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

 यूनियन के जिलाध्यक्ष नवीन सिंह करायत का कहना है कि पिछले साल भी जिले के पर्वतीय हिस्से की खेती सूखे की चपेट में आई थी, मगर किसानों को सूखे राहत के रूप में एक भी रुपया नहीं मिला। इस बार किसान अनदेखी पर चुप नहीं रहेंगे। यूनियन ने कहा कि इन हालातों के बावजूद किसानों की कर्ज माफी की मांग को भी नकारा जा रहा है।

सुुई के काश्तकार राजेश चौबे का कहना है कि बारिश नहीं होने से इलाके में 40 प्रतिशत से अधिक खेत खाली छोड़ दिए गए हैं। वहीं जिन खेतों में गेहूं व अन्य फसलों की बुवाई की गई, वहां भी गेहूं का जमाव नहीं हो सका है। गल्लागांव के नारायण दत्त सुतेड़ी का कहना है कि पहाड़ की फसल बारिश पर आश्रित होने से बर्बादी के कगार पर है। गेहूं व सब्जी की फसल बारिश व पाले की भेंट चढ़ गई है। उनका कहना है कि अब सिर्फ सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत पर किसान टकटकी लगाए हैं।

सितंबर से अब तक मात्र आठ एमएम बारिश हुई
जाड़ों में एकदम कम बारिश होने से रबी की फसल को झटका लगा है। सितंबर 2017 के बाद से अब तक जिले में महज आठ मिलीमीटर बारिश हुई है। यह बारिश दिसंबर में हुई। जबकि अक्तूबर व नवंबर 2017 में एक बूंद पानी नहीं बरसा। और यही हाल जनवरी 2018 के पहले 17 दिनों का है। कृषि विभाग का कहना है कि जनवरी में औसतन 45 से 57 एमएम बारिश होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में 2014 में  76, 2015 में 92, 2016 में चार तथा 2017 में 22 मिलीमीटर बारिश हुई है।
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