गरीबों के लिए सस्ता भोजन-सेहतमंद भोजन की थीम के साथ शुरू इंदिरा अम्मा भोजनालय को 19 नवंबर को एक साल पूरा हो गया है। पर यह योजना सब्सिडी के बावजूद अब भी कामयाबी के इंतजार में है। जिले में एकमात्र इंदिरा भोजनालय चंपावत में है, पर यहां भोजन करने वालों की कम संख्या इसके अस्तित्व पर खतरा बन रही है। औसतन रोजाना महज 65 लोग भोजन कर रहे हैं।
घाटे में चल रही इस योजना को मुनाफे में लाने के लिए महिला कामगारों की दिहाड़ी में 50 प्रतिशत की कमी की गई।
इंदिरा गांधी की जयंती 19 नवंबर 2015 से शुरू इंदिरा अम्मा भोजनालय को एक साल पूरा हो गया है। महंगाई के दौर में महज 25 रुपये में भोजन की थाली मिलने से लोगों को तो राहत मिली है। मगर भोजनालय चलाने वालों की चुनौती आसान नहीं है। इस दौरान 23163 लोगों ने होटल में भोजन किया। ग्राहकों से सालभर में 579075 रुपए मिले। इसके अलावा सरकार द्वारा प्रति थाली दस रुपए के हिसाब से सब्सिडी देने का प्रावधान था। पर 231630 के बजाय अभी 190690 रुपये ही सब्सिडी के रूप में मिले हैं।
भोजनालय के संचालक गिरधर सिंह फर्त्याल का कहना है कि शुरुआती महीनों में कैंटीन संचालन में घाटा हो रहा था। मजदूरी के अलावा भोजन सामग्री पर अधिक खर्च होने के बाद चलते नुकसान हो रहा था। घाटे से उबरने के लिए कामगारों की दिहाड़ी को कम किया गया। इसके चलते अब एक साल में कैंटीन को 46386 रुपए (औसतन 130 रुपये रोजाना) का लाभ हुआ।
नहीं खुल सका दूसरा इंदिरा अम्मा भोजनालय
सस्ते भोजन के लिए पिछले साल 19 नवंबर से शुरू इंदिरा अम्मा योजना को एक साल पूरा हो गया है। जिला मुख्यालय की कैंटीन के बाद दूसरा भोजनालय जिले में नहीं खुल सका। जबकि यहां दो अन्य भोजनालय यहां प्रस्तावित किए गए थे।
मुख्य विकास अधिकारी डा.आरएस पोखरिया का कहना है कि टनकपुर और लोहाघाट में इंदिरा अम्मा भोजनालय प्रस्तावित है। लेकिन स्थान नहीं मिलने से इस काम में अड़चन आ रही है। टनकपुर में इस सस्ते भोजनालय को रोडवेज बस स्टैंड के नजदीक खोलने की कोशिश की गई। मगर अभी तक इसे क्रियान्वित नहीं किया जा सका है।
टनकपुर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शेखर चंद्र जोशी का कहना है कि भवन, बर्तन और रसोई की सामग्री और फर्नीचर के लिए पालिका के पास धन नहीं है। बजट उपलब्ध कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। वहीं लोहाघाट के ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि लोहाघाट में इंदिरा अम्मा भोजनालय के जगह फाइनल नहीं हो सकी है। जगह की तलाश की जा रही है। इंदिरा अम्मा भोजनालय के संचालक गिरधर सिंह फर्त्याल का कहना है कि इंदिरा अम्मा भोजनालय शुरुआत में घाटे में चल रहा था। भोजन करने वालों की संख्या नहीं बढने के बाद घाटे से उबरने के लिए होटल में काम करने वालों की तादात कम की गई। 11 कामगारों के बजाय 7 से ही काम चलाया गया। साथ ही दिहाड़ी को भी 200 रुपए के स्थान पर 100 रुपए किया गया। तब जाकर कही मामूली मुनाफा हो पा रहा है।