सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत आवेदक को वांछित सूचनाएं देरी से देने पर चंपावत के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) पर जुर्माना लगाया गया है।
टनकपुर के मोहनपुर निवासी राजेंद्र खर्कवाल ने ठूलीगाड़ से पूर्णागिरि मेल क्षेत्र के बाइपास मार्ग में विभागीय अधिकारियों की अनुमति के बिना वन भूमि पर सीसी मार्ग बनाए जाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी। लोक सूचना अधिकारी और विभागीय अपीलीय अधिकारी की ओर से विलंब से सूचनाएं देने पर उन्होंने मामले को राज्य सूचना आयोग में दर्ज कराया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने डीएफओ चंपावत के स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए उन पर 21 दिन के विलंब के लिए 250 रुपये प्रतिदिन की दर से 5250 रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की यह धनराशि एक माह के भीतर राजकोष में जमा की जानी है। इस मामले को सूचना आयोग तक ले जाने वाले राजेंद्र खर्कवाल का कहना है कि सीसी मार्ग निर्माण में कई तरह की वित्तीय अनियमितताएं भी की गई हैं। जिनका भी आयोग ने संज्ञान लिया है।
लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद खुलेंगे बड़े घोटाले
चंपावत। आरटीआई कार्यकर्ता राजेंद्र खर्कवाल का कहना है कि राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद जिले में बड़े घोटालों का खुलासा होगा, क्योंकि राजनैतिक दबाव के कारण कई फाइलें ऑफिसों में ही दबा दी गई हैं। अधिकतर मामलों में मुख्य सचिव और मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित पड़ी है। उनका कहना है कि लोकायुक्त की तैनाती के बाद पारदर्शिता के साथ समाज तक विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की सही तस्वीर सामने आएगी।