उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम जल्द ही तीर्थाटन के साथ ही पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। धाम में करीब 35 करोड़ रुपये लागत की रोपवे योजना पर अमल शुरू हो गया है। शनिवार को रोपवे के लोअर टर्मिनल प्वाइंट हनुमानचट्टी पर भूमि पूजन कर कार्यदायी एजेंसी ने रोपवे निर्माण की कवायद शुरू कर दी है।
मां पूर्णागिरि धाम के विकास की पहल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई। 15 जून 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रोपवे योजना की आधारशिला रखी थी, लेकिन इसके बाद दो साल तक काम आगे नहीं बढ़ सका। अब राज्य की भाजपा सरकार ने रोपवे योजना को आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। शनिवार को क्षेत्रीय विधायक कैलाश गहतोड़ी के बड़े भाई मदन गहतोड़ी ने मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन पांडेय के पुरोहित्य में विधि-विधान से भूमि पूजन कर रोपवे निर्माण का शुभारंभ कराया। इस मौके पर एसडीएम अनिल चन्याल, कार्यदायी एजेंसी पूर्णागिरि रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी प्रालि. के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल कुमार शर्मा, केआर आनंद के अलावा हरीश हैसियत, नगर पालिका में विधायक प्रतिनिधि सुनील वाल्मीकि, एडवोकेट विजय शुक्ला, संजीव आर्य आदि मौजूद थे।
दो साल के अंदर रोपवे के सफर का आनंद ले सकेंगे श्रद्धालु
टनकपुर। मां पूर्णागिरि धाम में पीपीपी मोड पर निर्मित हो रहा रोपवे देश ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में चीन एवं स्विट्जरलैंड की तकनीक वाला अपनी तरह का पहला रोपवे होगा। सुरक्षित सफर के लिए यूरोपियन सेफ्टी तकनीक से बन रहे इस रोपवे में एक घंटे में एक हजार यात्री आवाजाही कर सकेंगे। रोपवे के निर्माण में अधिकतम दो साल का समय लगेगा। जिला पर्यटन अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी ने बताया कि कार्यदायी एजेंसी पूर्णागिरि रोपवे प्रोजेक्ट कंपनी प्रालि ने रोपवे के अपर टर्मिनल प्वाइंट काली मंदिर और लोअर टर्मिनल प्वाइंट हनुमानचट्टी की पहाड़ी का सर्वे शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि मां के धाम में निर्मित हो रहा यह रोपवे स्विट्जरलैंड की तकनीक पर आधारित और देश ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला रोपवे होगा। करीब नौ सौ मीटर लंबे इस रोपवे का निर्माण आधुनिक एवं नवीनतम यूरोपियन सेफ्टी तकनीक से किया जा रहा है। डबल रोप पर चलने वाली ट्रालियों में एक बार में 80 लोग और एक घंटे में करीब एक हजार लोग आवाजाही कर सकेंगे। आपातकाल स्थिति से निपटने के लिए यूरोपियन सेफ्टी तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। इस तकनीक में रोपवे के ठीक ऊपर एक अतिरिक्त रोप लगाई जाएगी, इसके माध्यम से आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित उतारा जाएगा। ऊपर से नीचे की ओर भी एक अतिरिक्त रोपे लगेगी, इससे जरूरत पढ़ने पर लोगों को जमीन पर उतारा जा सके। जिला पर्यटन अधिकारी ने बताया कि कार्यदायी एजेंसी द्वारा अपर एवं लोअर टर्मिनल प्वाइंट का सर्वे किया जा रहा है। प्रयोगशाला से स्वेल टेेस्टिंग रिपोर्ट मिलते ही रोपवे लगाने का काम काम शुरू होगा।