रीता गहतोड़ी, तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त
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धारा के विपरीत तैरने का साहस ही है जिसने लोहाघाट की रीता गहतोड़ी को बाल विवाह प्रथा पर अंकुश लगाने से लेकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के संचालन में सफलता दिलाई। इन्हीं कामों के लिए उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
रीता ने चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों सहित कई जगह विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। पिता की मृत्यु के बाद बहनों के साथ उनकी अर्थी को कंधा देकर चिता को मुखाग्नि दी। साल भर क्रियाकर्म कर नई परंपरा को विकसित किया। छह वर्ष से उन्होंने वाल्मीकि समाज के छोटे बच्चों को गोद लेकर उनको पढ़ाने का काम किया। रीता गहतोड़ी पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में 25 से अधिक नाबालिग बेटियों की शादी रुकवा चुकी हैं। साथ ही झगड़े और मामूली विवाद के चलते परिवार में होने वाले अलगाव को रोक नौ घरों को टूटने से बचा चुकी हैं। लघु कुटीर उद्योग की अवधारणा को जीवंत रखने के लिए 2016 से खादी के वस्त्र पहनने के साथ इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही हैं।
उनका सबसे बड़ा काम मानसिक रूप से कमजोर महिलाओं का सहारा बनना था। करीब 11 साल तक उन्होंने ऐसी महिलाओं की मदद की। उनकी काउंसलिंग कराई और उन्हें सामान्य जीवन जीने लायक बनाया। समाजसेवा की खातिर उन्होंने अविवाहित रहने का संकल्प लिया। कई प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक संगठन उनके काम के लिए उन्हें पुरस्कृत कर चुके हैं।