मां पूर्णागिरि धाम का दरार वाला हिस्सा।
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चंपावत। मां पूर्णागिरि मंदिर की चट्टानों में आई दरारों को भरने (रीस्टोरेशन) के काम को लेकर उम्मीद जगी है। परामर्शदाता कंपनी ने सर्वे पूरा कर लिया है। पांच सप्ताह में डीपीआर (विस्तृत प्रगति रिपोर्ट) आएगी। मुख्य मंदिर की पहाड़ी में 12 साल पूर्व कई जगह करीब पांच इंच चौड़ी दरार दिखी थी। इन दरारों से इस ऐतिहासिक मंदिर की सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाए जा रहे हैं।
विश्व बैंक की निर्माणदायी संस्था के ईई एससी आर्या ने बताया कि पुणे की नई परामर्शदाता एजेंसी ने मुख्य मंदिर की पहाड़ी में आई दरार का सर्वे पूरा कर लिया है। जनवरी के पहले हफ्ते में यह परामर्शदाता कंपनी डिजाइनिंग के साथ डीपीआर देगी। इस डीपीआर के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। शासन ने 2015 में उत्तराखंड आपदा राहत परियोजना से परामर्शदाता एजेंसी और सर्वे कराया। भूगर्भीय रिपोर्ट और परामर्शदाता एजेंसी ने 5500 फीट की ऊंचाई पर स्थित धाम की दरारों को भरने के साथ मुख्य मंदिर से 700 मीटर तक पैदल मार्ग की दो फीट की चौड़ाई को बढ़ाकर आठ फीट तक करने का सुझाव दिया था, लेकिन निविदा की प्रक्रिया की अड़चन से ये काम लटक गया। और अब नए सिरे से इसे फिर से शुरू कराया जा रहा है। मां पूर्णागिरि मंदिर शिवालिक चट्टानयुक्त क्षेत्र में स्लेटी बलुआ पत्थरयुक्त चट्टानों पर स्थित है। ये चट्टान अत्यधिक भंगुर प्रकृति की है। आसानी से रेत बन सकती है। कमजोर चट्टानों के अलावा संधियुक्त होने से मंदिर की स्थिति संवेदनशील है।