पूर्णागिरि धाम में क्षतिग्रस्त निगालीगाड़ पेयजल लाइन की जल संस्थान ने मरम्मत कर जलापूर्ति सुचारु कर दी है। बावजूद इसके धाम क्षेत्र में पानी की किल्लत बनी हुई है। गर्मी के बढ़ने के साथ ही स्रोतों में पानी की मात्रा घटने लगी है। दुकानदारों के साथ ही श्रद्धालुओं को भी पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
मां पूर्णागिरि धाम में हर साल मेले के दौरान पानी का संकट बना रहता है। छोटे-छोटे स्रोतों से लंबी लाइनें बिछाकर धाम क्षेत्र में जलापूर्ति की व्यवस्था की गई है। धाम के आसपास ऐसा कोई स्रोत नहीं है जिससे धाम क्षेत्र में पानी की समस्या दूर हो सके। धाम क्षेत्र में छह पेयजल योजनाओं से जलापूर्ति होती है। निगालीगाड़ के अलावा ढुंगागाड़ योजना, कैलाड़ीगूंठ योजना, भवानीगाड़ योजना, पापड़ योजना और ब्लाक की सनमोड़ा पेयजल योजना निर्मित है। इन पेयजल योजनाओं के स्रोतों में ठंड और बारिश के मौसम में तो पर्याप्त पानी रहता है लेकिन मेला अवधि में गर्मी के कारण पानी घटने से समस्या पैदा होती है। पानी डंप करने को जल संस्थान ने कोलाड़ीगूंठ में 25-25 हजार लीटर के दो और टुन्यास में 50-50 हजार लीटर के दो टैंक बनाए हैं। इन टैंकों से ही जल संस्थान द्वारा भैरव मंदिर से ऊपर समूचे धाम क्षेत्र में जलापूर्ति की जाती है, लेकिन इन दिनों स्रोतों में पानी घटने से टैंक नहीं भर पा रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि पानी की समस्या धाम के विकास में सबसे बड़ी बाधा है, जिसका समाधान जरूरी है। जल संस्थान के जेई बीएस कुवार्बी के मुताबिक पूर्णागिरि में पर्याप्त जलापूर्ति की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।