चंपावत के मंच गांव में चाय के बागान में काम करतीं महिलाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। चंपावत की जैविक चाय का दूर-दूर तक नाम है। मगर इस बार लॉकडाउन ने चाय सेक्टर को भारी झटक दिया है। इसका असर फैक्ट्री में चाय की प्रोसेसिंग से लेकर चाय बागान में काम करने वाले श्रमिकों तक को हुआ है। मगर अब चाय बोर्ड ने चाय मजदूरों को कुछ राहत दी है। चाय बोर्ड ने लॉकडाउन के दौरान काम ठप रहने पर चाय श्रमिकों को एक हफ्ते की मजदूरी देने का निर्णय लिया है। चाय बोर्ड के चंपावत के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि चंपावत जिले के करीब 397 महिला मजदूरों के बैंक खाते में सात दिन की रकम ट्रांसफर की जा रही है। इन सभी चाय मजदूरों को 316 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2212 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इससे मजदूरों को कुछ राहत मिलेगी। जिले के सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मुडिय़ानी, मौराड़ी, मझेड़ा, चौकी, मंच, सुयालखर्क, भगाना भंडारी, कालूखान, नरसिंहडांडा, गोसनी, लमाई, दुबडज़ैनल, खेतीखान आदि में 215 हेक्टेयर में चाय बागान में 11 हजार किलोग्राम चाय का उत्पादन हो रहा है। अप्रैल से टी फैक्ट्री में इस चाय को प्रोसेस किया जाता है।
--::: चंपावत के चाय बागानों को हराभरा कर रही महिलाएं :: चंपावत। चंपावत जिले का पहाड़ी हिस्सा चाय बागानों के लिए मशहूर है। स्वाद व सेहत से भरपूर यहां की चाय की मांग भी खूब है। इन बागानों को भरपूर बनाने में महिलाओं की जबर्दस्त भूमिका है। यहां की 397 महिलाएं चाय बागान में काम से नाम व नामा कमा रही हैं। चाय की खेती से लेकर प्रोसेस करने तक का संपूर्ण काम महिलाएं कर रही हैं। चाय बोर्ड प्रभारी डेसमंड बर्कबेक कहते हैं कि महिलाओं की मेहनत की बदौलत चाय के बागानों का विकास हुआ है। चाय की खेती को आगे बढ़ाकर महिलाओं ने खुद के लिए अपने गांव के पास ही रोजगार भी हासिल किया है। चाय के काम से जुड़ी महिलाएं सालभर में 25 हजार रुपये से ज्यादा कमा रही है। खास बात यह है कि नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र में पिछड़े गांव मंच में महिलाओं ने तीन साल में बागान को खूब विकसित किया है।
--::: तीन साल में हरेभरे हो गए बागान : "गांव की महिलाओं ने तल्लादेश क्षेत्र के चाय बागान को तीन साल में खूब हराभरा किया है। अब इन बागानों से चाय की अच्छी पैदावर हो रही है।" - जानकी महर, मंच।
--::: बेहतर हो रहे हैं आर्थिक हालात : दो साल से चाय बागान में काम करने से गांव के पास रोजगार मिलने के साथ ही परिवार को आर्थिक मजबूती मिल रही है।" -लक्ष्मी देवी, मंच।
लक्ष्मी देवी।
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लक्ष्मी देवी।
जानकी महर।
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जानकी महर।