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चंपावत में आलू व गेहूं की फसल पर रोग का साया

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चंपावत में खेत से आलू निकालती महिला। - फोटो : AMAR UJALA
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अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। कोरोना वायरस से चौपट अर्थव्यवस्था के बीच अब काश्तकारों पर चपत लगने का अंदेशा हो रहा है। पहाड़ में अभी गेहूं की कटाई शुरू भी नहीं हुई है कि उसमें रोग का साया पलगा है। इसी तरह कुछ जगह आलू में झुलसा रोग की चपेट में है। फसल बर्बाद होने की आहट से फिक्रमंद किसानों ने कृषि विभाग से तुरंत मदद की गुहार लगाई है। कोरोना वायरस के खतरे से बचाव को लगे लॉकडाउन से काश्तकार प्रभावित हो रही है। वहीं अब यहां फुलारगांव और आसपास के क्षेत्र में गेहूं व आलू की फसल पर पड़ रही मार किसानों की माथे की लकीर को बढ़ा रही है। किसान नारायण दत्त जोशी सहित कई लोगों का कहना है कि बेवक्त की बारिश और रतुवा रोग से गेहूं पर मार पड़ी है। गेहूं की बालियों में कालापन हो गया है। बता दें कि जिले के पहाड़ी हिस्से में गेहूं की कटाई जून में होती है। इसी तरह आलू की फसल में भी झुलसा रोग के आगोश में है। इसके चलते खोदे जाने वाले आलू के दाने भी बेहद छोटे निकल रहे हैं। क्षेत्र की करीब १५ हेक्टेयर खेती पर रोग का असर पड़ा है। किसानों ने कृषि व उद्यान विभाग से मौका मुआयना कर रोग से निजात दिलाने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की गुहार लगाई है। चंपावत में ११०५ हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है। इसी तरह जिले में ७००९ हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। किसानों को होने वाली आय का मुख्य हिस्सा इन फसलों से ही आता है। फोटो १७ सीपीटी ०१पी से ०३पी तक कोट कृषि विभाग की टीम मौके पर भेजी जा रही है। किसानों के लिए किसी भी तरह की समस्या के लिए कंट्रोल रूम (०५९६५-२३०८४३) बनाया गया है। जहां वे संपर्क कर समस्या बता सकते हैं। किसानों को कीटनाशक व अन्य जरूरी दवा के छिड़काव करने की सलाह दी गई। किसान इन दवाओं को कृषि निवेश केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं। राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी।
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चंपावत में बर्बाद हुई आलू की फसल। - फोटो : AMAR UJALA
चंपावत में बर्बाद हुई आलू की फसल।
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रोगग्रस्त गेहूं की फसल। - फोटो : AMAR UJALA
रोगग्रस्त गेहूं की फसल।
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