मानव तस्करी के लिहाज से हिमालयी राज्यों में अव्वल उत्तराखंड में तस्करों के चंगुल से बचाए लोगों के लिए सरकार ने उज्ज्वला पुनर्वास योजना चलाई है। इधर, बजट के अभाव में राज्य में खुले पांच में से तीन पुनर्वास केंद्र बंद हो चुके हैं। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के दो केंद्र अनुदान के संकट से जूझ रहे हैं। इन केंद्रों को चार साल में सिर्फ छह माह का ही अनुदान मिला है।
मानव तस्करी की शिकार महिलाओं, बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास, एकीकरण, यौन शोषण के लिए बहला-फुसलाकर ले जाई जाने वाली महिलाओं और बच्चों को गलत हाथों में पड़ने से बचाने के लिए सरकार ने वर्ष 2007 में उज्ज्वला योजना शुरू की थी। योजना के तहत उत्तराखंड में पांच पुनर्वास केंद्र स्थापित किए गए थे। इनमें से यूएस नगर, हरिद्वार, देहरादून के केंद्र बंद हो चुके हैं। चंपावत के बनबसा में रीड्स और पिथौरागढ़ जिले में कार्ड संस्था के दो केंद्र संचालित हैं।
रीड्स के अध्यक्ष कैलाश चंद्र लोहनी ने बताया कि पुनर्वास केंद्रों के संचालन के लिए पहले केंद्र सरकार से अनुदान मिलता था, लेकिन अब राज्य का महिला कल्याण विभाग अनुदान देता है। वर्ष 2016 से सिर्फ छह माह का ही अनुदान मिल पाया है, जबकि विभाग को प्रगति और अनुश्रवण रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। ऐसे में तस्करों से बचाए गए लोगों को संरक्षित करने के साथ भवन का किराया और संस्था के कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान भी नहीं हो सका है। कमोवेश यही हाल वर्ष 2015 में खुले पिथौरागढ़ के पुनर्वास केंद्र का भी है।
बनबसा में 985 तो पिथौरागढ़ में 313 किए गए संरक्षित
बनबसा में रीड्स संस्था वर्ष 2010 से पुनर्वास केंद्र चला रही है। इसमें कुल 985 महिलाओं और बच्चों को संरक्षित किया जा चुका है। पिथौरागढ़ में कार्ड संस्था के केंद्र में 336 महिलाओं और बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से बचाकर संरक्षित किया गया है।
जल्द भुगतान पर ले लिया जाएगा फैसला
उज्ज्वला योजना वर्ष 2019 में समाज कल्याण से महिला कल्याण विभाग को हस्तांतरित हुई है। योजना के बजट ट्रांसफर की कार्रवाई में विलंब होने से अनुदान का भुगतान नहीं किया जा सका है। अब महिला कल्याण विभाग के पास बजट आ चुका है, लेकिन चार साल पहले के अनुदान का कैसे भुगतान किया जाए, इस पर मंथन चल रहा है। जनवरी अंत तक अनुदान के भुगतान पर फैसला ले लिया जाएगा।
- मेजर योगेंद्र यादव, अपर सचिव, महिला कल्याण विभाग, उत्तराखंड।
बनबसा केंद्र में संरक्षितों की संख्या
वर्ष संरक्षितों की संख्या
2010 158
2011 190
2012 95
2013 84
2014 74
2015 136
2016 61
2017 52
2018 84
2019 34
2020 17
पिथौरागढ़ केंद्र में संरक्षितों की संख्या
वर्ष संरक्षितों की संख्या
2015 15
2016 52
2017 89
2018 82
2019 81
2020 17