चंपावत/लोहाघाट (चंपावत)। जिले के मिरतोला, सैंदर्क, फोर्ती, चौमेल, पाटी, दिगालीचौड़, मूलाकोट आदि स्थानों में रामलीलाओं की जबरदस्त धूम मची है। कड़ाके की ठंड के बावजूद भी लीला देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। बड़ोली में राजतिलक के साथ रामलीला मंचन का समापन किया गया। वहां सुरेंद्रपाल यादव, चंद्र सिंह बिष्ट, मथुरादत्त गहतोड़ी को सम्मानित किया गया। संचालन हरीश थ्वाल ने किया।
इस दौरान रेबाधर थ्वाल, दिनेश थ्वाल, खीमानंद, हेम चंद्र, धर्मानंद जोशी, रामदत्त थ्वाल, लक्ष्मीदत्त थ्वाल आदि थे। फोर्ती में पूर्व विधायक केसी पुनेठा ने दीप जलाकर लीला का शुभारंभ किया। सातवें दिन की लीला में सीता हरण से लेकर बालि वध तक की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान अजय कलखुड़िया ने जग घुमिया थारे जैसा न कोई गाकर धूम मचाई। कमेटी के अध्यक्ष उमेश पुनेठा की अध्यक्षता और संचालन त्रिलोचन पुनेठा ने किया। वहीं चौमेल में दशरथ मरण के बाद केवट का राम लक्ष्मण का गंगा पार करवाना।
भरत शत्रुघ्न के ननिहाल से अयोध्या पहुंचकर मंथरा को दुत्कारने तक की लीला दिखाई गई। दशरथ योगेश, कैकई भूपाल, भरत प्रदीप, शत्रुघ्न विजय रहे। पाटी में दशरथ कैकई संवाद का शानदार मंचन किया गया। कैकई कहती है ऐसो ही वेश बनाउंगी आज, मैं नहीं बोलूं झूठ पलटिजा चाहे धरा सारी। दशरथ का अभिनय महेश चंद्र भट्ट, कैकई का रमेश पाटनी के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र राज लडवाल, लीला निर्देशक महेश चंद्र गहतोड़ी, सागर मौनी, संगीतज्ञ चतुर सिंह मौनी आदि सहयोग दे रहे हैं।