चंपावत की मल्लीहाट रामलीला में सूर्पणखा नासिका छेदन, सीता हरण और जटायु मरण का मंचन हुआ। साधु के छदम वेश से सीताहरण करने वाले रावण से सीता ने कहा-लिये जात हरि राव आज यह दुष्ट निशाचर साधु।
लोहाघाट नगर, कर्णकरायत, भिंगराड़ा में रामलीला की धूम मची हुई है। ठंड के बावजूद मंचन देखने दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शिक्षक नरेश राय के संचालन में लोहाघाट नगर में रावण दरबार में नृत्यांगनाओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। उसके बाद सीता हरण, श्रीराम लक्ष्मण का सीता जी की खोज में सबरी आश्रम में जाने, बाली सुग्रीव युद्ध की लीला दिखाई गई। कर्णकरायत में सीता की खोज, राम विलाप, हनुमान सुग्रीव-राम संवाद की लीला दिखाई गई। भिंगराड़ा में राजा जनक की सभा, श्रीराम ने शिव धनुष का भंजन, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, सीता विवाह की लीला दिखाई गई।
टनकपुर के ज्ञानखेड़ा में चल रही रामलीला के सातवें दिन ननिहाल से अयोध्या लौटे भरत और शत्रुघ्न को राम, लक्ष्मण, सीता को वनवास भेजे का पता चला तो वे व्यथित हुए। भरत, शत्रुघ्न माता कौशल्या, सुमित्रा औैर सुमंत को साथ लेकर भगवान राम के पास वन में पहुंचते हैं। भरत के लाख आग्रह के बाद भी भगवान राम अयोध्या लौटने को राजी नहीं हुए। इधर, गांधी मैदान में चल रही रामलीला में हनुमान द्वारा अशोक वाटिका को तहस-नहस कर लंका में आग लगाने का मंचन हुआ।
बनबसा और गढ़ीगोठ की रामलीला में बाली-सुग्रीव के बीच युद्ध के बाद भगवान राम बाली का वध कर सुग्रीव को राजगद्दी सौंपते हैं। सुग्रीव भगवान राम को सीता को खोजने में मदद करने का आश्वासन देता है। जटायु के भाई संपाती के बताए अनुसार हनुमान सीता खोज में लंका को प्रस्थान करते हैं।