लोहाघाट की रामलीला में बीते छह वर्षों से श्रीराम का अभिनय कर रहे 30 वर्षीय जितेंद्र पुनेठा उस छवि को अभिनय से साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। रामलीला की शुरुआत से ही वह अपनी भाव-भंगिमाओं, संवाद-संप्रेषण और हालात के अनुकूल अभिव्यक्ति द्वारा मंच पर गजब का आकर्षण पैदा करते हैं।
लक्ष्मण-परशुराम के बीच क्रोधाग्नि में श्रीराम के रोल में सहज ही अपने सौम्य स्वभाव से शांति की वर्षा कर देते हैं। पिता दशरथ की मृत्यु के बाद उनका विलाप, सीता हरण और लक्ष्मण शक्ति के बाद विलापों में अपनी आवाज में इतना करुण रस घोलते हैं कि श्रोताओं की आंखों से बरबस ही आंसू बहने लगते हैं। श्रीराम के चरित्र का अभिनय करते-करते जितेंद्र खुद एक विनम्र, अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठता का जीवनयापन कर रहे हैं। सामाजिक जीवन में उनका सद्चरित्र और मृदुल व्यवहार लोगों को आकर्षित करता है।
रामायण धारावाहिक से प्रभावित हुए जितेंद्र
जितेंद्र का कहना है कि उनके परिवार के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं तथा बचपन से ही उन्हें रामायाण धारावाहिक एवं रामलीला ने प्रभावित किया है। तबसे ही वह श्रीराम के चरित्र से प्रेरित होकर इस प्रकार का रोल करना चाहते थे। लोहाघाट में वर्षों से एक ही जगह रामलीला होने की वजह से अभिनय के इच्छुक कलाकारों की काफी भीड़ होती थी। उम्दा कलाकार के चयन की परीक्षाओं में बहुत सी कसौटियों पर खरा उतरना भी एक चुनौती होता था। मैने इस चुनौती को श्रीराम के संवादों के भाव एवं अभिनय की बारीकियां समझकर इस मुकाम को हासिल किया है। जितेंद्र का कहना है कि उन्होंने यहां की रामलीला में सुमित्रा, सुग्रीव, सुमंत्र का अभिनय किया है। उनका कहना है कि पिथौरागढ़ सदर की रामलीला में भी वह सुमित्रा का पाठ कर चुके हैं। सुमित वर्तमान में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं।