लंबे समय से जोकर की भूमिका निभा रहे एडवोकेट विजय राय लोहाघाट की रामलीला का एक अहम किरदार हैं। विभिन्न आकृतियों के साथ मंच में दस्तक देते ही दर्शक दीर्घा से तालियों की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है। व्यावहारिक जीवन में धीर-वीर-गंभीर दिखने वाले विजय लोगों के चेहरों में भी अपने हास्य-प्रहसनों से मुस्कान लाने में माहिर हैं।
हास्य प्रहसनों की शुरुआत में विजय ने अपने साथियों गिरीश राय, मुकेश साह के साथ एक दशक पूर्व इसी मंच पर ऐसा दिलकश प्रदर्शन किया कि दर्शक अपने स्थान पर लोटपोट करते रहे। इसके बाद विजय की इस कला की डिमांड हर साल दर्शकों द्वारा की जाने लगी। विजय कभी नाक लंबी, टूटा चश्मा, पायजामे में एक पैर में आधा एवं दूसरे पैर में पूरा पहनकर आने, बालों की अलग पहचान बनाने और अपना विभिन्न रूप बनाकर दर्शकों को लोटपोट कराने में काफी माहिर हैं। उनकी इस कलाकारी से रामलीला में दर्शकों की संख्या में भी इजाफा होता है।