मल्लीहाट की महिला रामलीला ने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। 2011 में यहां की महिलाओं द्वारा उठाया एक छोटा कदम मील का पत्थर साबित हो रहा है। महिलाएं भी पुरुष से कम नहीं, इसी वाक्य ने दर्शकों के सामने नया विकल्प दे दिया है। महिलाओं के शानदार अभिनय को देखने पुरुष रामलीला से अधिक भीड़ जुटती है।
आदर्श रामलीला कमेटी के बैनर तले चल रही पुरुषों की रामलीला नेेे 126 साल का शानदार सफर तय किया है। उसी के नक्शेकदम पर चल रही है यहां की महिला रामलीला। रामलीला के तालीम मास्टर मुक्तेश पचौली ने बताया कि पांच वर्ष पहले कुछ महिलाओं ने रामलीला में अभिनय करने की ठानी। उनके इस अभियान को अमलीजामा पहनाने में मदद की दो नौजवानों सौरभ साह और रोहित पचौली ने। उन्होंने महिलाओं का न केवल हौसला बढ़ाया, बल्कि उन्हें अभिनय की बारीकियों से रूबरू भी कराया। पहली बार में ही दर्शकों ने महिलाओं के प्रदर्शन की खूब सराहना की।
अभिनय को मिल रहे अपार जनसमर्थन ने महिलाओं के इरादों को ऐसे पंख दिए कि दर्शकों को हर साल महिलाओं की रामलीला का बेसब्री से इंतजार रहता है। पहली बार महिला रामलीला में राम का पात्र शिवानी तड़ागी, लक्ष्मण का दीक्षा पचौली, सीता का अर्पणा पनेरू, बाणासुर का अनुराधा साह, रावण का मोनिका साह, परशुराम का यशोदा लडवाल और विश्वामित्र का किरदार तनूजा तड़ागी ने निभाया।
अगले साल से महिलाएं निभाएंगी महिला किरदार
महिला रामलीला की सफलता से उत्साहित कार्यकर्ता अब पूरी रामलीला में महिलाओं को रोल देने पर विचार कर रहे हैं। आयोजक मुक्तेश पचौली ने बताया कि अगले वर्ष से पूरी रामलीला में महिला किरदारों का रोल अब महिलाओं से कराने की कोशिश की जाएगी, जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भाई-बहन निभा रहे राम का किरदार
पहले वर्ष में विश्वामित्र का रोल निभाने वाली तनुजा तड़ागी को अभिनय विरासत में मिली है। तीन वर्षों से वह लगातार राम का किरदार निभा रही हैं। इस वर्ष पुरुष रामलीला में राम का किरदार तनुजा के भाई भानुप्रताप तड़ागी निभा रहे हैं। तनुजा और भानु प्रताप के पिता स्व.भुवन तड़ागी की गिनती श्रीराम के बेहतरीन कलाकारों में की जाती थी।