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16 साल से दशानन की भूमिका निभा रहे महेश मुरारी

Wed, 21 Oct 2015 10:51 PM IST
विनोद काला/अमर उजाला, बनबसा
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महेश मुरारी हर साल दो बार रावण का रोल करते हैं। 16 वर्षों से वे दशानन का जीवंत अभिनय कर रहे हैं। रामलीला का यह खलनायक अनूठी संवाद शैली और किरदार से दर्शकों का खास चहेता है। रामलीला मंचन में जब रावण का बड़ा रोल होता है, तब महेश मुरारी के अभिनय को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।
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एलआईसी में कार्यरत भजनपुर निवासी महेश मुरारी को रावण का पात्र निभाने की प्रेरणा अपने बड़े भाई हरीश मुरारी और दीप मुरारी से मिली। मुरारी परिवार रावण का पात्र निभाने में दक्ष माना जाता है। बनबसा रामलीला के बाद वे फागपुर की रामलीला में भी रावण की भूमिका निभाते हैं।

वास्तविक जीवन में धीर-गंभीर और मृदु भाषी मुरारी मंच पर रावण के ज्ञान, साहस, कुशल योद्धा के साथ ही अहंकार में मदमस्त चरित्र को जीवंत करते हैं। कहते हैं कि रावण के चरित्र के बिना रामलीला का मंचन संभव नहीं है। भगवान श्रीराम के हाथों खर-दूषण के मारे जाने के बाद रावण को आभास हो गया था कि नारायण का अवतार हो गया है। रावण ने अहंकार में ही सही, लेकिन त्रिकालदर्शी होने का सबूत पेश कर सभी परिजनों को राम-लक्ष्मण के साथ युद्ध करने को कहकर मोक्ष दिला दिया।
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दान करते हैं इनाम की रकम
रावण का किरदार करने वाले महेश मुरारी के अभिनय शैली से दर्शकों की ताली के साथ ही इनाम भी सबसे ज्यादा मिलता है, लेकिन वे इस रकम को अपने पास नहीं रखते। फागपुर रामलीला में मिली राशि को रामलीला कमेटी को और बनबसा में मिले धन को व्यास की भूमिका निभाने वाले कलाकार को भेंट करते हैं।
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