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चंपावत जिला अस्पताल के रेडियोलोजिस्ट ने इस्तीफा दिया

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चंपावत के सीएमओ डॉ.आरपी खंडूरी। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत जिला अस्पताल के रेडियोलोजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने मुख्य चिकित्साधिकारी की कार्यप्रणाली से आहत होकर इस्तीफा दे दिया। बृहस्पतिवार को उन्होंने अपना त्यागपत्र जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक के जरिए स्वास्थ्य महानिदेशक और स्वास्थ्य निदेशक को भेजा है। इससे पूर्व सीएमएस डॉ. आरके जोशी ने इस्तीफा नहीं देने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे।
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मई 2008 से सरकारी सेवा में कार्यरत डॉ. प्रदीप बिष्ट 2018 में रेडियोलोजिस्ट के रूप में जिला अस्पताल आए थे। 26 अगस्त को दोपहर 1:15 बजे अस्पताल पहुंचे रीठा साहिब के एक मरीज ने रेडियोलोजी विभाग पर अल्ट्रासाउंड नहीं करने का आरोप लगाया था।
इधर, रेडियोलोजी विभाग की ओर से बताया गया कि अल्ट्रासाउंड पंजीकरण एक बजे तक होते हैं और उस वक्त करीब 15 लोगों के परीक्षण होने बाकी थे। इन 15 परीक्षण के बाद रीठा साहिब की महिला का परीक्षण कराने की बात विभाग की ओर से कही गई थी।
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डॉ. बिष्ट ने त्याग पत्र में कहा है कि 27 अगस्त को सीएमओ ने उनसे या जिला अस्पताल से पक्ष जाने बगैर अल्ट्रासाउंड नहीं होने की छपी खबर को अपने फेसबुक वॉल पर डाल दिया जो एक प्रकार से उनकी ओर से प्रमाणिकता की मूक सहमति थी। सीएमओ की कार्यप्रणाली को लेकर बुधवार को जिला अस्पताल में कार्य बहिष्कार भी रहा। बृहस्पतिवार सुबह डॉ. बिष्ट ड्यूटी पर आए।
वह चार मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर चुके थे तभी उन्हें प्रशासन के निर्देश पर सीएमएस द्वारा भेजा गया स्पष्टीकरण पत्र मिला। रेडियोलोजिस्ट का कहना है कि बगैर किसी गलती के उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। वह स्पष्टीकरण देने के बजाय त्यागपत्र देना ज्यादा उचित समझते हैं।
मैंने अपने सेवाकाल में पूरी निष्ठा के साथ कार्य किया है। 26 अगस्त को उनकी रीठा साहिब की महिला मरीज या उनके तीमारदार से कोई बात नहीं हुई। रेडियोलोजी विभाग के उनके सहकर्मी से तीमारदार की बात हुई थी जिसमें उन्होंने इमरजेंसी प्रकरण को छोड़ दोपहर एक बजे बाद अल्ट्रासाउंड पंजीकरण नहीं होने की बात कही थी। मरीज या तीमारदार के साथ किसी तरह की अभद्रता नहीं की गई। सीएमएस ने फोन कर परीक्षण कराने का आग्रह किया था तब उन्होंने पहले से लाइन में लगे 15 लोगों के बाद महिला का परीक्षण करने की बात कही थी, लेकिन मरीज चला गया। इस पूरे मामले में सीएमओ के रवैये से आहत हैं और सरकारी सेवा से इस्तीफा दे रहे हैं।
- डॉ. प्रदीप बिष्ट, रेडियोलोजिस्ट
जिला अस्पताल के रेडियोलोजिस्ट का न तो उनके पास पत्र आया है और न ही इस इस्तीफे की कोई जानकारी है। ये मामला दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने फेसबुक वॉल पर अखबार की कटिंग नहीं डाली थी, बल्कि किसी अन्य न भेजी थी।
-डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत
जिला अस्पताल में अब नहीं हो सकेंगे अल्ट्रासाउंड
- गर्भवती महिलाओं को होगी सबसे अधिक परेशानी, इस साल अब तक हुए 2529 अल्ट्रासाउंड
चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। रेडियोलोजिस्ट के इस्तीफे को स्वीकार करने या नकारने का निर्णय तो स्वास्थ्य महानिदेशक लेंगे, लेकिन तब तक अल्ट्रासाउंड नहीं हो सकेंगे। इससे मरीजों को भारी परेशानी होगी। जिले में अब एकमात्र लोहाघाट सरकारी अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने पर बीपीएल और गर्भवती महिलाओं को निशुल्क सुविधा नहीं मिल सकेगी तो अस्पताल को एपीएल श्रेणी के मरीज के अल्ट्रासाउंड से मिलने वाली 418 रुपये की धनराशि का भी नुकसान होगा। रेडियोलोजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट ने इस साल जनवरी से अब तक जिला अस्पताल में 2529 परीक्षण किए हैं। इन परीक्षणों से अस्पताल को चार लाख रुपये से अधिक का राजस्व मिला है।
11 माह पूर्व माइक्रोबाइलोजिस्ट ने भी दिया था इस्तीफा
चंपावत। जिला अस्पताल के एक अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर ने सितंबर 2018 में इस्तीफा दिया था। अप्रैल 2018 में राज्य लोक सेवा आयोग के जरिए नियुक्त माइक्रोबाइलोजिस्ट डॉ. रजनी शर्मा ने स्वास्थ्य महानिदेशक को त्यागपत्र भेजा था। राजस्थान की रहने वालीं डॉक्टर ने इस्तीफे की वजह पारिवारिक बताई थी। सीएमएस का कहना है कि उनका इस्तीफा जिला अस्पताल के माध्यम से स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजा था जो फिलहाल स्वीकार नहीं हुआ है। उनके जाने के बाद से यह पद भी रिक्त है।
चंपावत जिला अस्पताल में रिक्त हैं इन विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद:
कार्डियोलोजिस्ट, गायनाकोलोजिस्ट, ईएनटी, नेत्र रोग, सर्जन, यूरोलोजिस्ट, चर्मरोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, मनोचिकित्सक।

इस्तीफा देने वाले चंपावत के रेडियोलोजिस्ट डॉ.प्रदीप बिष्ट।- फोटो : CHAMPAWAT

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